यह सिर्फ एक फिल्म का गाना ही नहीं बल्कि किसी के दिल का सच्चा हाल भी हो सकता है। यह हाल एक प्रेमी-प्रेमिका, माता-पिता, भाई-बहन, पति-पत्नी किसी के भी प्यार को लेकर हो सकता है।
माता-पिता के प्यार को विदेश जा चुके या यूँ कहे उनसे दूर रह रहे हर उस इंसान के दिल की सच्ची कहानी बयाँ करता है।
भाई-बहन के मामले को लेकर भी कुछ ऐसा ही प्रतीत होता है। जब बहन की शादी हो जाती है और अपने ससुराल में बैठी अपने अतीत को याद करती हुई, अपने बड़े या छोटे भाई के स्नेह को, उसके प्यार-दुलार को याद करती हुई अपने दिल में भाई के बारे में सोचती हुई उस दिल की तस्वीर साफ देखी जा सकती है जिसे आप उसी गाने के साथ जोड़कर उसका अर्थ समझ सकते हैं।
पति-पत्नी जो कि एक ही घर में, एक ही छत के नीचे रहने के बाद भी अपनी खराब या झगड़ालू आदतों के कारण एक-दूसरे के दिल से दूर हो जाते हैं। तब यही गाना दोनों के दिलो-दिमाग पर हावी रहता है। लेकिन अपने स्वभाववश वे एक-दूसरे की कमियाँ और खामियाँ ढूँढ़ते हुए अपने दिल में बसे उस प्यार को एक-दूजे से इतना दूर कर देते हैं कि साथ-साथ रहते हुए भी यही गाना गुनगुनाने पर मजबूर हो जाते हैं लेकिन समय और आदतों में सुधार न हो पाने के कारण अपने दिल पर गहरा दवाब महसूस करते रहते हैं।
और अब अंत में बारी आती है प्रेमी-प्रेमिका की। जो एक-दूसरे से प्यार तो बहुत करते हैं, बहुत प्यार होने का दावा तो करते हैं, प्यार में एक-दूजे के लिए जान देने की बातें करते हैं, कसमें भी खाते हैं लेकिन थोड़ा-सा अपने प्यार, अपने व्यवहार, अपने बोलचाल में बदलाव लाना नहीं चाहते। शुरु-शुरु में तो सब अच्छा ही चलता है। लेकिन जब बात अहं और एक-दूसरे के प्रति समर्पित होने की आती है तब यही अहं बातों को गलत तूल देकर दिलों में दूरियाँ पैदा कर लेते हैं। और फिर ऐसे में एक ही गाना दिल में दोहराते रहते हैं 'िजएँ तो िजएँ कैसे बिन आपके'। हम क्यों नहीं समझ पाते हैं कि रिश्तों को तोड़ने में सिर्फ एक लम्हा लगता है जबकि जोड़ने में बरसों बीत जाते हैं।
क्या आप भी इसी तरह की प्रवृत्तिवाले इंसान हैं तो आज ही अपनी छवि में सुधार कर लें ताकि इस गाने को दोहराने से बच जाएँ। अगर आपने भी कभी इस तरह का कोई गाना यादों के साये में बैठकर दोहराया है तो हमें बताएँ हम उसे अवश्य प्रकाशित करेंगे।
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