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बस जी रहा हूँ...  Search similar articles
- अखिलेश
ND

बहार कहती है मुझसे कि
वो आएगी जरूर
मगर वो है कि आती नहीं है

उसके न आने से
चाँदनी की तपन भी मुझे
झुलसाती है

ताँता लगा है अपनों का आसपास
मगर इस भीड़ में भी तन्हा हूँ
बस उसकी याद के सहारे
जी रहा हूँ।
और भी
सहजता
प्यार का आखिरी अंदाज़ बाकी है
क्यों?
राह-ए-मोहब्बत
वॉलपेपर से जानिए व्यक्तित्व
हौसलों के पंख पर