एक छोटे से शहर में एक लालची नाई साधो रहता था। उसके पास किसी चीज की कमी नहीं थी। परंतु एक ही सपना देखता था कि वह किसी भी तरह अमीर बन जाए। उसी शहर में माधो नाम का एक गरीब व्यक्ति भी रहता था। वह प्रतिदिन नियम से भगवान शिव की पूजा करता था। माधो सिर्फ पूजा-पाठ ही नहीं करता था बल्कि वह अच्छा आदमी था। दूसरों की मदद के लिए वह हमेशा तैयार रहता था। एक बार उसे पैसों की बहुत सख्त जरूरत पड़ी। कहीं से भी पैसों का इंतजाम नहीं हो सका। माधो बड़ा परेशान रहने लगा। परेशानी वाले दिनों में ही एक रात सपने में माधो को भगवान शिव दिखाई दिए।
भगवान ने कहा कि माधो हम तेरे जैसे सच्चे भक्त से बड़े खुश हैं, कहो क्या चाहिए? माधो बोला- प्रभु मैं आनंद मैं हूँ, बस इन दिनों धन की ही थोड़ी जरूरत है। भगवान ने कहा- बस इतनी सी बात। कल सुबह तुम स्नान करके किसी नाई से अपना मुंडन करवाकर अपने घर के पास की झाड़ियों के पीछे छिप जाना। उस समय एक मोटा डंडा अपने हाथ में जरूर रखना। तुम्हारे पास से जो भी पहला व्यक्ति निकले उसे डंडा मार देना और वह सोने के ढेर में बदल जाएगा। सोने को पाकर तुम धनवान हो जाओगे और तुम्हारी तकलीफें दूर हो जाएँगी।
अगले दिन सुबह जागकर माधो ने वैसा ही किया। वह नहाकर पड़ोस में रहने वाले साधो नाई के पास गया और उससे मुंडन करवाकर अपने घर के पीछे झाड़ियों में छिप गया। लेकिन उसे पता नहीं था कि साधो नाई एक पेड़ के पीछे छुपकर उसे देख रहा है। दरअसल माधो को इतनी सुबह-सुबह मुंडन कराने आया देखकर साधो को आश्चर्य हुआ था। इसी का पता लगाने के लिए वह पेड़ के पीछे छुपकर माधो को देख रहा था। इधर जैसे ही पहला व्यक्ति वहाँ से गुजरा, माधो ने उसे डंडा मारा और वह व्यक्ति सोने के ढेर में बदल गया। यह सारी घटना लालची साधो ने देख ली।
डंडे की चोट से पहलवान के सिर में टेमला पड़ गया। पहलवान ने साधो के हाथ में डंडा देखा और उसकी हड्डी-पसली एक कर दी। पिटाई ऐसी उड़ी कि अगले महीने भर तक साधो बिस्तर पर पड़ा रहा।
अगले दिन साधो नाई ने खुद ही अपना सिर मूँड लिया और अपने घर के पास ही एक मोटा डंडा लेकर खड़ा हो गया और उधर से गुजरने वाले किसी व्यक्ति का इंतजार करने लगा। अचानक किसी के आने की आवाज सुनाई दी और साधो तैयार हो गया। ठीक समय पर उसने निकलने वाले आदमी को जोर से डंडा मारा। डंडे की चोट जिसे लगी वह गाँव का पहलवान रामलाल था। डंडे की चोट से पहलवान के सिर में टेमला पड़ गया। पहलवान ने साधो के हाथ में डंडा देखा और उसकी हड्डी-पसली एक कर दी। पिटाई ऐसी उड़ी कि अगले महीने भर तक साधो बिस्तर पर पड़ा रहा। इस तरह लालची साधो को उसकी लालच का फल मल गया।