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इमली का भूत
टिल्लू चाचा
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अबे जा बे। तूने भूत देखा और भूत ने तुझे छोड़ दिया। चंद्रशेखर उर्फ चंदू ने गुल्लू से कहा। हमीद ने भी चंदू की तरफदारी की। हाँ सही तो है। इमली वाले भूत को देखने के बाद तो अच्छे अच्छों की हवा निकल जाती है। हमीद बोला महीने भर पहले अम्मी ने अब्बा को घनश्याम का किस्सा बताया था। गुल्लू ने बीच में टोका- कौन घनश्याम? अरे वही जिसकी पान की दुकान है। वह रात को कहीं से आ रहा था। वह भी भूत-वूत में विश्वास नहीं करता था। और जब वह इमली के पास से गुजर रहा था तो किसी ने उससे माचिस माँगी। घनश्याम ने जेब से माचिस निकालकर देनी चाही तो माचिस माँगने वाला आदमी बहुत ही लंबा था इतना लंबा कि इमली के पेड़ से भी लंबा।

हाँ और उसी दिन से घनश्याम बीमार पड़ा है। उसे डर लग रहा है। भैया यह भूत बड़ा खतरनाक होता है। जो उसको देख ले फिर उसे नींद नहीं आती। चंदू गुल्लू की तरफ इशारा करके बोला- और ये कह रहा है कि इसने भूत को देखा। और इसे कुछ नहीं हुआ। अब इमली वाला भूत इसका चचा लगता है जो इसे ऐसे ही छोड़ दिया। गुल्लू बोला- अरे मैं सच कह रहा हूँ।

भगवान की कसम हमीद मैंने इमली वाले भूत को देखा। हमीद-अबे झूठ मत बोल यार, तेरे कसम खाने से भगवान कहाँ मरने वाले हैं। वो तो अमर है। चंदू ने बीच में बात पकड़ी- अच्छा तो यह बता कि भूत कैसा दिख रहा था। अरे वही सफेद कपड़े पहने हुए था और क्या। तूने भूत कितनी बजे देखा? रात के १२ बज रहे होंगे और क्या। तो तूने भूत कहाँ से देखा हमीद ने पूछा। गुल्लू ने कहा- अपनी घर की छत से। पर तेरी छत से तो इमली दूर है। गुल्लू- इसलिए तो मैंने भूत को देखा पर भूत मुझे नहीं देख सका। चंदू बोला- यार मेरी बड़ी इच्छा है कि एक बार तेरी छत से इस भूत को देखूँ। मैंने आज तक भूत नहीं देखा।

और फिर तेरी छत से भूत देखने में तो डर की भी कोई बात नहीं है। हम भूत को देख लेंगे और वह हमें नहीं देख पाएगा। तो ठीक है यह बहुत अच्छा रहेगा। तो फिर कल हम तेरे घर की छत पर ही सोएँगे। गुल्लू- ठीक है मैं मम्मी से पूछ लूँगा। अगर उन्होंने हाँ कर दी तो फिर हम जल्दी ही मेरी छत से भूत को देखेंगे। तो ठीक है चंदू और हमीद ने एक साथ कहा।

दूसरे दिन सुबह तीनों मिले। तीनों की भूत के बारे में बातचीत शुरू हो गई। गुल्लू ने कहा- भूत से मुलाकात से पहले उसके बारे में और बातें जान लें तो कैसा रहेगा? मोहल्ले में एक जमना चाचा ही थे जिनके पास इमली वाले भूत के बहुत सारे किस्से थे। जमना चाचा के पास तो भूतों के किस्सों का खजाना था। तीनों जमना चाचा के पास पहुँचे। चंदू ने पूछा क्यों चाचा, आपने देखा है क्या इमली वाला भूत? अरे हाँ, क्यों नहीं देखा। भई और सब डरते होंगे उससे, अपन बिलकुल नहीं डरते। और वह अपना क्या बिगाड़ेगा। अपन को हनुमान चालीसा पूरी याद है। जैसे ही भूत आए बस हनुमान चालीसा बोलना शुरू कर दो। सुनते ही भूत की हवा निकल जाती है। हमसे तो उलटा भूत डरता है।

चाचा भूत दूसरों को परेशान क्यों करता है? गुल्लू ने पूछा। जमना चाचा ने कहा- तुमसे किसने कहा कि भूत दूसरों को परेशान करता है। भूत सिर्फ उन्हीं को परेशान करता है जो देर रात तक इधर-उधर भटकते रहते हैं। अब दिन में भला किसी को भूत दिखा है क्या? हमीद बोला आप ठीक कह रहे हैं। अम्मी भी कहती है कि रात को जल्दी घर आ जाना चाहिए। इधर-उधर नहीं भटकना चाहिए। शायद वे इसीलिए कहती हैं। अब से उनकी बात का ज्यादा ध्यान रखना पड़ेगा। चलो अब मुझे बहुत काम है और इमली वाले भूत की बाकी बातें फिर कभी बताऊँगा, यह कहकर जमना चाचा अपने काम में लग गए। बच्चों को इस बातचीत में यह मंत्र मिला कि हनुमान चालीसा याद कर लेने से भूत की भी हवा निकाली जा सकती है।
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