कुछ कथाओं के पीछे सच होता है तो कुछ के पीछे गप। पर जो भी हो कुछ कथाएँ इसी कारण मजेदार बन पड़ती हैं। 'सच और गप वाली कहानी' में प्रस्तुत है तीसरी कहानी। यह कहानी अमेरिका में रहने वाले मॉ-डोक इंडियन्स के बीच सुनी-सुनाई जाती है।
बहुत समय पहले जंगल में पक्षियों और जानवरों के बीच लगातार लड़ाइयाँ चलती थीं। किसी दिन लड़ाई में जानवरों का पलड़ा भारी रहता तो कभी पंछी भारी पड़ते थे। जो समूह जीत जाता था उसे हारने वाले से हर्जाने से रूप में अच्छा खासा भोजन मिलता था। जंगल में एक चमगादड़ भीरहता था जो बहुत आलसी और आरामतलब था। इसलिए उसने हर्जाना न चुकाने के लिए एक तरकीब सोच ली। एक दिन लड़ाई में चमगादड़ पक्षियों की ओर से लड़ रहा था। लड़ाई में जानवरों का पलड़ा भारी था और वे जीतते नजर आ रहे थे।
ऐसे में चमगादड़ जाकर पेड़ पर उलटालटक गया। थोड़ी देर बाद ही उस दिन की लड़ाई में जानवरों का झुंड जीत गया। चमगादड़ ने जब देखा तो वह झट से जानवरों के झुंड में शामिल हो गया। अचानक शेर की नजर चमगादड़ पर पड़ी और उसने गुर्राते हुए चमगादड़ से कहा- तुम तो पक्षियों की ओर से लड़ रहे थे तो अब हमारे साथ क्यों आ रहे हो। चमगादड़ ने जवाब दिया कि नहीं भला मैं पक्षियों की ओर से क्यों लडूँगा। देखो मेरे तो दाँत हैं। क्या किसी पक्षी के दाँत होते हैं। यह सुनकर शेर ने चमगादड़ का भरोसा कर लिया।
चमगादड़ उस दिन जानवरों के साथ मजे से भोजन कर सका। कुछ दिनों बाद की लड़ाई में पक्षियों ने जानवरों को नाकों चने चबवा दिए और जब पक्षियों का समूह जीत गया तो चमगादड़ उनके साथ शामिल हो गया। जब पक्षियों के सेनापति गरुड़ ने यह देखा कि कुछ दिनों पहले चमगादड़ जानवरों के साथ था तो उसने चमगादड़ से पूछा। चमगादड़ ने कहा कि मैं तो पक्षियों के ही साथ हूँ। देखो मेरे तो पंख भी हैं। मैं भला जानवरों का साथ क्यों दूँगा। गरूड़ ने कहा ठीक है। इसी तरह चमगादड़ हमेशा जीतने वाले झुंड के साथ हो जाता। कुछ दिनों तक ऐसा ही चलता रहा। कुछ दिनों बाद पक्षियों और जानवरों में सुलह हो गई।
सभी ने सोचा कि इस तरह लड़ने से कुछ फायदा नहीं है। सभी ने एक-दूसरे को गले लगाकर बधाई दी और दुश्मनी मिटा दी। ऐसे में चमगादड़ फँस गया। जब पक्षियों और जानवरों के समूह को पताचला तो उन्होंने चमगादड़ से कहा कि तुमने दोनों समूहों के साथ धोखा किया है, इसलिए अब तुम रोजाना रात को अकेले ही उड़ोगे। न तो कोई पक्षी तुम्हारा साथी रहेगा और न ही कोई जानवर। और तब से अब तक चमगादड़ रातों को अकेले ही उड़ रहे हैं। दूसरोंके साथ जो बुरा करता है आखिर उसके साथ बुरा ही होता है।
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