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काम की बात : बड़े काम पहले...
एक बार एक विशेषज्ञ बच्चों के बीच पहुँचे। उन्होंने सभी बच्चों को एक प्रयोग दिखाने को कहा। बच्चे बड़े खुश हुए और तुरंत जमा हो गए। विशेषज्ञ ने एक काँच का बर्तन लिया और उसे बच्चों के सामने टेबल पर रख दिया। अब उसमें पत्थर के कुछ बड़े टुकड़े लिए और उन्हें बर्तन में डालना शुरू किया। कुछ ही देर में बड़े टुकड़ों से बर्तन भर गया और अब उसमें और टुकड़े आने की गुंजाइश नहीं थी। विशेषज्ञ ने बच्चों से पूछा- क्या बर्तन पूरा भर गया है।

बच्चों ने जवाब दिया- हाँ, यह पूरा भर गया है। अब विशेषज्ञ ने छोटे पत्थर निकाले और उन्हें खाली जगह में डालना शुरू किया। बर्तन में छोटे पत्थरों के लिए जगह निकल आई। थोड़ी ही देर में बर्तन में और अधिक छोटे पत्थर आने की गुंजाइश नहीं बची। विशेषज्ञ ने बच्चों से पूछा कि क्या बर्तन पूरी तरह भर गया है। बच्चों ने जवाब दिया- नहीं। विशेषज्ञ खुश हुआ।उसने कहा- बहुत अच्छे।

अब विशेषज्ञ ने रेत निकाली और बर्तन में डालना शुरू की। कुछ ही देर में खाली जगह में रेत समाती चली गई। कुछ देर बात और रेत बर्तन में जाने की जगह नहीं बची। तब फिर से विशेषज्ञ ने पूछा क्या बर्तन भर गया है। बच्चों ने जवाब दिया- नहीं। विशेषज्ञने बड़ी खुशी में कहा- बहुत अच्छे। अब उसने एक पानी की बोतल निकाली और बर्तन में पानी डालना शुरू किया। बर्तन में जब और अधिक पानी जाने की जगह नहीं रही तो विशेषज्ञ ने बच्चों से पूछा- इस बर्तन के उदाहरण से तुम क्या समझे?

एक बच्चे ने कहा कि अगर हम कोशिश करें तो अपने लिए जगह बना सकते हैं। विशेषज्ञ ने कहा- नहीं। इस उदाहरण से हमें यह सीखना चाहिए कि हमें जो काम पहले करना है वे पहले ही पूरे होने चाहिए। अगर बड़े पत्थर के टुकड़े बर्तन में सबसे पहले नहीं डाले जाते तो उन्हें बाद में उतनी संख्या में नहीं डाला जा सकता था। तो सोचो कि सबसे पहले तुम्हारे लिए बड़े काम क्या हैं।
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