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दिशा का ज्ञान
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एक हट्टा-कट्टा और लंबा चौड़ा व्यक्ति सामान लेकर एक स्टेशन पर उतरा। वह स्टेशन से बाहर आया और अपने लिए टैक्सी तलाशने लगा। सामने ही एक टैक्सी वाला खड़ा था। उस व्यक्ति ने टैक्सी वाले से कहा मनोरम बिल्डिंग जाना है, कितना पैसा लोगे? टैक्सी वाला बोला 100 रु. लगेंगे। उस व्यक्ति ने बुद्धिमानी दिखाते हुए कहा- इतने पास के 100 रु., यह क्या लूट मचा रखी है। मैं पैदल ही अपना सामान लेकर मनोरम बिल्डिंग तक पहुँच जाऊँगा।

आदमी जिद्दी था और इसी कारण उसने अपना सामान उठाया और पैदल ही चलने लगा। आधे घंटे तक चलने के बाद उसे फिर से वही टैक्सी वाला दिखाई दिया। उसने टैक्सी वाले को रोका और कहा कि अब तो आधी दूरी तय हो गई है अब कितना पैसा लोगे? टैक्सी वाला बोला अब 200 रु. लगेंगे। आदमी हैरान रह गया और उसने पूछा कि पहले 100 लग रहे थे और अब 200 क्यों लगेंगे। टैक्सी वाले ने फट से जवाब दिया महाशय आप मनोरम बिल्डिंग से ठीक उल्टी दिशा में 3 किलोमीटर दूर आ गए हैं। मनोरम बिल्डिंग स्टेशन के दूसरी ओर है। उस व्यक्ति ने इसके बाद कुछ नहीं कहा और चुपचाप गाड़ी में बैठ गया। बात सच भी है सिर्फ ज्ञान होने से कुछ नहीं होता बल्कि ज्ञान के साथ विवेक भी जरूरी है। इसी तरह सिर्फ शक्ति होना पर्याप्त नहीं है बल्कि शक्ति का समझ के साथ इस्तेमाल जरूरी है।
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