दोस्तो, इन गर्मी की छुट्टियों में आईपीएल क्रिकेट टूर्नामेंट देख रहे हो या नहीं? खूब चौके-छक्के की धूम मच रही है। हमारे पहले मैच में ही मुझे मैन ऑफ द मैच का पुरस्कार मिला। हमारी टीम ने भी शुरुआती मैच में अच्छा प्रदर्शन किया। ट्वेंटी-20 में बैट्समैन तो खूब छक्के उड़ाते हैं बॉलर की मुसीबत बन आती है। बहुत ध्यान से ही सही एरिया में बॉल को टिप्पा देना पड़ता है तब विकेट उड़ती है। अब कुछ बचपन की बातें।देखो हर बड़े क्रिकेटर की शुरुआत गली क्रिकेट से होती है। जिसने मोहल्ले में क्रिकेट के कारण डाँट नहीं खाई समझो वह अच्छा क्रिकेटर नहीं बन सकता है। मैं बचपन में रायबरेली की सँकरी गलियों में क्रिकेट खेला करता था। यहीं मेरा जन्म हुआ। घर पर मुझे भी धूप में खेलने के कारण बहुत डाँट पड़ती थी पर मैं दोस्तों के साथ धूप में इधर-उधर भटका करता था। इस छोटी सी जगह पर मेरे लिए करने को बहुत ज्यादा चीजें नहीं हुआ करती थीं। बस यहाँ दोस्त बहुत अच्छे थे तो उनके साथ दिनभर क्रिकेट खेलने का मजा रहता था। मैं शुरुआत से बॉलर था। दोस्तो, मैं फुटबॉल खेलने में भी रुचि रखता था। पर मुझे लगा कि मैं क्रिकेट में ज्यादा बेहतर कर सकता हूँ और इसलिए मैंने क्रिकेट पर ध्यान जमाया। मुझे याद है कि एक बार रायबरेली स्टेडियम में मैंने एक क्रिकेट मैच देखा था। स्टेडियम का माहौल ही ऐसा था कि उसने मुझे अपनी तरफ खींच लिया। यहाँ के रोमांच ने मुझ पर जो असर किया वह मैं अभी तक नहीं भूला। घर में मेरी दो छोटी बहनें भी हैं और कुछ बड़ा होने पर जब मैं क्रिकेट खेलने के लिए बाहर जाता था तो उन दोनों को बहुत मिस करता था।रायबरेली में सुविधाओं के न होने से मैं लखनऊ आ गया। यहाँ करीब 250 दोस्त मिले। सभी की इच्छा है अच्छा स्पोर्ट्समैन बनने की थी। मैं यहाँ सुबह के सेशन में प्रैक्टिस करता। फिर स्कूल जाते और शाम को फिर ग्राउंड पर। रात होते-होते इतना थक जाते थे कि क्या बताऊँ। खैर इन सारी बातों से खिलाड़ी को निकलता होता है तभी वह मैदान पर हर तरह का प्रेशर झेल पाता है। 50 ओवर्स मैदान में फील्डिंग करना आसान नहीं है। उसके लिए बहुत मेहनत करना होती है। चुस्त और फुर्तीला रहना पड़ता है। ग्राउंड पर खूब मेहनत करने से ही अच्छा खिलाड़ी तैयार होता है। लखनऊ होस्टल से ही मैं एमआरएफ पेस एकेडमी, चेन्नई के लिए सिलेक्ट हुआ। इसके बाद तो भारतीय टीम ज्यादा दूर नहीं थी। पर आज भी मुझे अपने रायबरेली के दिन खूब याद आते हैं। अब एक बार यह भी सुनो कि भारतीय टीम में आ जाने से ही सबकुछ नहीं हो जाता है। जब देश की टीम में देश से सिर्फ 11 खिलाड़ियों को चुना जाता है तो चयन के लिए तुममें क्या खास है, यह दिखाना होता है। देश के लिए जीत का जज्बा होना जरूरी है। पर हार से सखकर अगली बार अच्छा प्रदर्शन करते भी आना चाहिए। देश के लिए खेलते हुए मुझे यह बात हमेशा लगती है कि देश में कई लोग इस समय हमें देख रहे हैं। उनकी भावनाएँ हमसे जुड़ी हैं और इसलिए मैं अपना सौ प्रतिशत मैच में लगाता हूँ। यह काम जरूरी नहीं है कि क्रिकेट में ही किया जाए। हर जगह ईमानदारी और देश के प्रति अपनापन मन में रखना चाहिए। तुम ऐसा सोचोगे तभी हमारा देश अच्छा बनेगा। तो अब बहुत बातें हुई। बस कुछ बातें और...। गर्मी की ये छुट्टियाँ घर पर बैठे-बैठे मत निकाल देना। कुछ न कुछ अपनी पसंद का काम जरूर करना। जो भी तुम्हें पसंद हो। क्रिकेट न भी पसंद हो तो और कुछ काम करना। पढ़ना पसंद हो तो वही करना। पर बचपन के दिनों की हमारी रुचि ही हमारा करियर बने तो इससे अच्छा कुछ नहीं हो सकता है। हमेशा अपने चयन में पक्के रहना जो करना है वह जल्दी चयन करने से तुम हर काम बेहतर कर पाओगे।तुम्हारा आरपी सिंह |