दोस्तो,
बारिश आने वाली है और जब तक स्पेक्ट्रम का यह अंक आपके हाथों में होगा, हो सकता है बारिश हो भी चुकी हो। बारिश के दिनों में बच्चों को मस्ती करने के बहुत से बहाने मिल जाते हैं। मैं भी इन दिनों खूब शैतानी किया करता था। बारिश ही क्यों, वैसे तो सारे दिन मजे के होते हैं। हर मौसम में घूमने जाना चाहिए और प्रकृति और अलग-अलग हिस्सों को देखने की कोशिश करना चाहिए।
जो ज्यादा इधर-उधर घूमता है वह चीजों के बारे में ज्यादा जानता है। मैंने भी 'भारत-दर्शन' यात्रा इसी बात को ध्यान में रखकर की। कहाँ झाबुआ और कहाँ उड़ीसा। पर देश में अगर एक जगह से दूसरी जगह जाओ तो बहुत सी अच्छी बातें जानने को मिलती हैं। जैसे झाबुआ में जानने को मिला कि वहाँ मकई की रोटी बहुत ही अच्छी बनती है और उसे गरमागर्म खाने का तो मजा ही कुछ और है।
दोस्तो, हमारे परिवार में हर किसी ने 'द डिस्कवरी ऑफ इंडिया' जरूर पढ़ी है। यह एक अद्भुत किताब है। इस किताब को पढ़ने से भी भारत के बारे में बहुत सी बातें जानने को मिलती है। मैंने भी यह किताब पढ़ी है। इसमें मेरे परनाना पं. नेहरू ने भारत की आजादी की लड़ाई और इतिहास के बारे में बहुत सी बढ़िया बातें बताई हैं। इस तरह अगर हम अपने देश को बेहतर तरीके से जानते हैं तो हमें पता चलता है कि हमारा देश कितना महान है। तुम भी भारत के बारे में इस तरह की अनूठी जानकारी इकट्ठी करके उससे कोई बढ़िया प्रोजेक्ट आने वाली 15 अगस्त के लिए तैयार कर सकते हो।
दोस्तो, मेरी शुरुआती पढ़ाई दिल्ली में हुई, फिर कुछ समय मैं देहरादून के दून स्कूल में रहा, फिर दिल्ली के स्कूल में और फिर विदेश में। इस तरह पढ़ाई किसी भी एक जगह नहीं हुई। सभी जगह थोड़े-थोड़े समय पढ़ने का मौका मिला। इस कारण ज्यादा दोस्त भी नहीं बन पाए। अच्छे दोस्त बहुत जरूरी होते हैं। उनके साथ पढ़ाई करने में भी मजा आता है और खेलकूद में भी। आप नए सत्र में जब स्कूल खुले तो अच्छे दोस्त जरूर बनाना।
अपने बारे में एक बात यह भी बताना चाहूँगा कि मैं ज्यादा बोलता नहीं हूँ। इसके बजाय मुझे काम करना ज्यादा पसंद है। मैं पत्र लिखता हूँ और हमेशा अपने काम की चीजें नोट करता रहता हूँ। ज्यादा बड़बड़ करना भी कई बार अच्छा नहीं होता है। लोग कहते हैं कि नेता को ज्यादा बोलना चाहिए पर मैं मानता हूँ कि उसे काम ज्यादा करना चाहिए ताकि लोगों को फायदा मिले। सिर्फ बोलने भर से कुछ नहीं होता है।
दोस्तो, मैं दिनभर खूब रैलियों में जाता हूँ। इधर-उधर की सभाओं में जाता हूँ पर इसमें मैं अपनी पसंद की चीज ढूँढ लेता हूँ। ये यात्रा थकाती तो हैं पर जब आप उनमें मजे करने लगते हो तो थकान पल भर में दूर हो जाती है।
मैं दिल्ली में रहता हूँ तो देखता हूँ कि यहाँ हरियाली धीरे-धीरे कम होती जा रही है। गर्मी बढ़ रही है और अब दिल्ली पहले जैसी नहीं लगती। अगर हम सब एक-एक पेड़ लगाएँ तो हरियाली फिर से लौटाई जा सकती है। आप भी अपने आस-पास ऐसा कर देखो। इस बार की स्पेक्ट्रम की चित्रकथा और संपादक की चिट्ठी भी तो यही कहती है। अपना खयाल रखना और हाँ, मुझे जन्मदिन पर तुम्हारी शुभकामनाओं का इंतजार रहेगा।
तुम्हारा राहुल गाँधी
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