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करण जौहर का जन्मदिन  Search similar articles
सच कर दिखाओ अपना सपना
(जन्मदिन : 25 मई)

अगर तुम सोचते हो कि तुम्हें शाहरुख खान की तरह बनना है तो तुम बन सकते हो। बस उसके लिए तुम्हें वैसा काम करके दिखाना होगा।

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दोस्तो, मैं बचपन से ही फिल्म बनाने का सपना देखता था। स्कूल से बंक मारकर मैंने खूब फिल्में देखीं। मुंबई में रहते हुए फिल्में देखने में कोई मुश्किल नहीं होती थी। मेरे पास बहुत सी फिल्मों की कैसेट्‍स थीं जिन्हें मैं रोज देखता था। कोई भी नई फिल्म देखता तो मेरा मन होता कि उस फिल्म में अच्छा क्या लगा है उस बारे में सोचूँ।

ऐसा करते-करते मैं फिल्मों के साथ जुड़ता चला गया। फिल्म बनाना मेरा सपना था और अब मैं सचमुच फिल्में बनाता हूँ। शाहरुख भी बचपन में हीरो बनने का सपना देखता था और आज वह हीरो है। तुम भी अगर कोई सपना देखो तो उसे पूरा करने में जुट जाओ। तुम्हारा सपना पूरा होगा। उसके लिए खूब अच्छे से पढ़ना। गर्मियों के इन दिनों में अगर तुम ठान लो कि तुम्हें कुछ न कुछ नया सीखना है तो तुम बहुत आसानी से सीख सकते हो। हर बात अगर हम पहले ही सोच लें तो हम उसे पूरा कर सकते हैं।

मैं जब कॉलेज में गया तो मेरी दोस्ती आदित्य चोपड़ा से हुई। बाद में आदित्य के साथ रहकर ही मैंने फिल्म बनाना सीखा। हम अगर अपने स्कूल या कॉलेज में अच्छे दोस्त बनाते हैं तो वे हमारे खूब काम आते हैं। दोस्त सिर्फ साथ खेलने के लिए ही नहीं होते हैं बल्कि वे पढ़ाई और आगे बढ़ने में एक दूसरे की मदद करते हैं।
  मेरी शाहरुख खान से जो दोस्ती हुई वह एक फिल्म के समय हुई और हम बहुत अच्छे दोस्त बन गए। आज भी दोस्ती बनी हुई है। मैं मानता हूँ कि स्पेक्ट्रम पढ़ने वालों के भी कई सारे दोस्त होंगे।      

मेरी शाहरुख खान से जो दोस्ती हुई वह एक फिल्म के समय हुई और हम बहुत अच्छे दोस्त बन गए। आज भी दोस्ती बनी हुई है। मैं मानता हूँ कि स्पेक्ट्रम पढ़ने वालों के भी कई सारे दोस्त होंगे। दो दोस्त एक-दूसरे से भी बहुत सीख सकते हैं। मैंने भी अपने दोस्तों से इस तरह की चीजें सीखी हैं।

अपने पापा से भी मैंने बहुत कुछ सीखा है। वे जब किसी से बात करते तो सामने वाले की बात पूरी तरह सुनते थे ताकि उसे समझ सकें और इसलिए लोग उनकी बात मानते थे। मैंने देखा कि पापा मुझे मेरे मनपसंद का काम करने देते थे ताकि मुझे अच्छा लगे और उन्होंने कभी ‍मुझे फिल्में देखने से रोका नहीं, हालाँकि मैं पढ़ाई करने में भी पीछे नहीं रहा।

रिजल्ट अच्छा रहता तो नई कैसेट मिल जाती थी इसलिए पढ़ाई के नंबर अच्छे लाने के लिए खूब पढ़ता था। तो इस तरह मेरे बचपन में मैंने ज्यादातर संगीत, डायलॉग और निर्देशन जैसी बातों को सीखने पर ही ध्यान दिया।

मैं मानता हूँ कि हमें एक समय में एक ही चीज सीखना चाहिए और जब तक उसे ठीक ढंग से सीख न लें दूसरी चीज सीखने का नहीं सोचना चाहिए। ऐसे में हम कोई भी एक चीज नहीं सीख पाते हैं। मैंने फ्रेंच भी सीखी और पेरिस से मास कम्युनिकेशन में डिग्री भी ली है पर खास बात यह है कि मुझे नया कुछ भी पढ़ना और सीखना ज्यादा अच्छा लगता है। आज भी फिल्म बनाते हुए अगर कोई कुछ कहता है तो मैं बड़े ध्यान से सुनता हूँ। दूसरों को सुनना जरूरी है।

और हाँ, झूठ कभी नहीं बोलना चाहिए। सच कहने में कोई झिझक नहीं होना चाहिए। मैंने बचपन में एक बार झूठ बोला था पर अब नहीं बोलता हूँ। हुआ यूँ था कि पापा की कोई फिल्म नहीं चली और मेरे दोस्त ने स्कूल में मुझसे पूछा कि तुम्हारे पापा की फिल्म अच्छी नहीं है तो मैंने उसे कहा था कि मेरे पापा फिल्म नहीं बनाते, वे तो बिजनेसमैन हैं।

पर अब मैं ऐसा नहीं करता हूँ। तो दोस्तो, ये मेरे बचपन की कुछ बातें हैं, फिल्म जितनी मजेदार तो नहीं है फिर भी इनसे तुम कुछ तो सीख ही सकते हो। मुझे अपने लिए नई चीजें खरीदने का भी बहुत शौक है। मैं अपनी स्टाइल का बहुत ध्यान रखता हूँ। तुम स्मार्ट हो जानते हो 'फर्स्ट इम्प्रेशन इज द लास्ट इम्प्रेशन।

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