तुम भी डांस सीखना चाहते हो तो एनडीटीवी इमेजिन पर हर सोमवार से शुक्रवार तक शाम 7 बजे आने वाला मेरा शो जरूर देखना। माधुरी दीक्षित और मेरे बीच बहुत अच्छी दोस्ती है। वह बहुत जल्दी डांस सीख लेती है।
प्यारे दोस्तो,
इन दिनों आप टेलीविजन पर मुझे डांस सिखाते हुए देख रहे होंगे। आप में से जो बच्चे डांस में रुचि रखते हैं वे तो मुझे बहुत अच्छे से जानते भी होंगे। आज मैं स्पेक्ट्रम के इस पन्नो पर आपसे कुछ बातें करने आई हूँ। अब आपकी गर्मियों की छुट्टियाँ चल रही होंगी। तो सोचो कि आपने इन गर्मियों में क्या किया। इस तरह हर दो महीने या तीन महीने बाद सोचो कि हमने नया क्या सीखा है। इस तरह सोचने पर ही तुम कुछ न कुछ सीखते जाओगे।
टीवी पर तुम देखते होगे कि डांस सिखाते हुए मैं बहुत डाँटती भी हूँ पर डाँट जरूरी है। जब मैं डांससीखती थी तो गलत करने पर हमें तो बहुत मार पड़ती थी। जब तक थोड़ी डाँट नहीं होती तब तक अच्छा काम करने का मन नहीं होता। आपको भी कोई डाँटे तो उसे अगली बार अच्छा काम करके दिखाना। किसी की डाँट का बुरा नहीं लगाना। पता है जब मैंने फिल्मों में कामशुरू किया तब मेरी उम्र सिर्फ 3 साल की थी। इस समय पहली बार मैंने चाइल्ड आर्टिस्ट के तौर पर एक्टिंग की थी। और डांस तो मैंने 2 साल की उम्र से ही शुरू कर दिया था।
हममें से हर कोई किसी खास चीज के लिए बना होता है तभी तो बचपन से ही हमें वह काम करना अच्छालगता है। जैसे कि अभी पिछले दिनों आई फिल्म 'तारे जमीं पर' फिल्म में दर्शील को छोटी-छोटी चीजें देखना अच्छा लगता है और पढ़ाई में उसका मन नहीं लगता है पर उसे पेंटिंग करना अच्छा लगता है। बचपन में ही हमें अपनी रुचि के अनुसार चीजें सीखना चाहिए। पढ़ाई करने सेसबकुछ नहीं होता बल्कि हमें क्या आता है वह महत्वपूर्ण होता है। इन दिनों तो सीखने के लिए बहुत सी चीजें हैं। तो कुछ न कुछ जरूर सीखो।
तो दोस्तो, चाइल्ड आर्टिस्ट से शुरुआत करके मैंने ग्रुप में कई लोगों के साथ डांस करना शुरू किया। इसके बाद मैं डांस मास्टर की सहायक बन गई। इसके बाद कई सालों तक मेहनत करते हुए मैं कोरियोग्राफर बन पाई हूँ। कुछ बनने के लिए हमें खूब मेहनत करनाहोती है और सबसे ज्यादा जरूरी होता है कि अपना काम ठीक तरीके से करना। कोई हॉबी क्लास ज्वाइन करो तो पूरे मन से करना।
डांस के लिए मैं किसी स्कूल नहीं गई बल्कि मैंने अपनी रुचि के हिसाब से खुद ही डांस सीखने की कोशिश की और सीखती चली गई। आज फिल्मों में हीरो-हीरोइनों को मैं बताती हूँ कि किस तरह उनका डांस होना चाहिए। मैं डांस में नई स्टेप सीखने के लिए खुद सोचती हूँ कि नया क्या हो सकता है। हर बार नई तरह की स्टेप से ही लोगों को कोई भी डांस पसंद आता है।
दोस्तो, डांस आना या न आना तो सिर्फ एक बात है। इसके अलावा भी बहुत-सी चीजें हैं जो हमें सीखना चाहिए। जैसे मैं अपने बेटे राजू के साथ बिलकुल दोस्त की तरह बातचीत करती हूँ। वो मेरी बात मानता है और मैं उसकी। इस तरह एक-दूसरे की बात सुनने की आदत आपभी डालना। जरूरी नहीं कि हर बार आप जो कह रहे हो वह सही हो। आपके मम्मी-पापा आपको जो करने को कहते हैं वह आपके लिए ज्यादा अच्छा होता है। तो उनकी बातें भी सुनो और अपनी बात उनसे जरूर कहो।
स्पेक्ट्रम के दोस्तो, एक बात यह भी कहूँगी कि मैं सुबह नमाज पढ़ती हूँ और फिर अपने सारे काम शुरू करती हूँ। इस तरह मैं ईश्वर से कहती हूँ कि मैंने कल जो किया उसमें सभी के लिए अच्छा किया और आज जो करूँगी वह भी सबके लिए अच्छा हो। इस तरह तुम भी दूसरों का ध्यान रखकर काम करना और हमेशा तुम्हारे काम भी अच्छे होंगे।
तुम्हारी सरोज खान
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