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सतीश कौशिक अंकल का बचपन
जन्मदिन : 13 अप्रैल
मुझे अपना जन्मदिन मनाने का बड़ा शौक है और वो भी खासकर बच्चों के साथ। उनके साथ मस्ती करने में बहुत मजा आता है। अपने बचपन के दिन याद आ जाते हैं। इसी तरह मिस्टर इंडिया फिल्म में भी बच्चों के साथ काम करते हुए आपके दोस्त कैलेंडर को यानी मुझे बहुत मजा आया।

वो वाकई बहुत अच्छी फिल्म थी जिसमें हमने ढेर सारी मस्ती की। दोस्तो, हर काम को मस्ती करते-करते पूरा करो तो काम झटपट पूरा हो जाता है और अगर हम उसमें बहुत ज्यादा सीरियस हो जाएँ तो कई बार काम बोझ जैसा बन जाता है। तो आप भी हर काम में अपनी मस्ती बनाए रखना।

दोस्तो,

आज मैं तरह-तरह की फिल्में बनाता हूँ। कुछ आपको पसंद आती है तो कुुछ नहीं आती होगी, पर निर्देशक बनना मेरे लिए इतना आसान नहीं था। मेरा बचपन दिल्ली के करोलबाग इलाके में बीता। दिल्ली के स्कूल से ही मैंने पढ़ाई पूरी की और फिर किरोरीमल कॉलेज सेआगे की पढ़ाई की। इसके बाद मुझे फिल्मों में काम करने का बहुत शौक था इसलिए मैंने नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में दाखिला ले लिया। इसके बाद मैंने पुणे के फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट में भी अच्छी फिल्म कैसे बनाई जाए यह सीखने की कोशिश की।

बचपन से हीपता नहीं कैसे यह धुन सवार हो गई थी फिल्म में काम करना है। जब मैं पढ़ रहा था तो मैंने यह बात अपनी एक दोस्त को बताई। उसने मेरी बात सुनकर कहा कि तुम फिल्मों में काम करना चाहते हो। कभी आईने में अपनी शक्ल देखी। यह सुनकर मुझे बहुत बुरा लगा कि आखिर मैं क्यों फिल्मों में काम नहीं कर सकता हूँ। मैंने हिम्मत नहीं हारी और देवानंद साहब के दफ्तर के चक्कर लगाने लगा। यहाँ मुझे उनके दफ्तर के बाहर खड़े सिक्योरिट गार्ड ने धक्के मारकर भगा दिया।

इस वक्त मुझे बहुत दुख हुआ और मैं नजदीक के एक रेस्टोरेंट में जाकर बहुत देर तक बैठा रहा। जब भी मैं दुखी होता हूँ तो खूब खाता हूँ और फिर मेरे लिए सब कुछ ठीक हो जाता है। मैं कभी हार नहीं मानता हूँ। इसके बाद ही मुझे मिस्टर इंडिया में कैलेंडर का रोल मिला और लोगों को मेरा काम पसंद आया। हमारे साथ जिंदगी में ऐसे बहुत से मौके आते हैं, जबकि चीजें हमारे मन माफिक नहीं हो पाती है। ऐसे में अपना काम करते जाना ही सबसे अच्छा तरीका है। देखिए ना धक्के खाने के बाद भी मैंने हार नहीं मानी और आज मैंने कई फिल्में बनाई हैं।

एक बात और, अगर हमें अपने बचपन से ही मालूम हो जाए कि हमें क्या करना है तो हमें उस बारे में सोचना शुरू कर देना चाहिए। जैसे अगर हम सॉफ्टवेअर इंजीनियर बनना चाहते हैं तो फिर हमें गणित की अच्छी पढ़ाई करना होती है। इसी तरह अगर हमें डॉक्टर बनना है तो बायलॉजी पढ़ना होता है। यह बहुत जरूरी है कि हम देखें कि हमें क्या करना है। खैर ज्यादा सोचने की जरूरत भी नहीं है, क्योंकि धीरे-धीरे खुद-ब-खुद समझ आने लगता है कि हमें आगे क्या करना है। तो काम जारी रखो।

आप सभी ने होली पर खूब मस्ती की होगी। यह मस्ती सालभर बनी रहना चाहिए। इसी तरह इन छुट्टियों का भी सही ढंग से उपयोग करना। इन छुट्टियों में नई जगह देख सको तो यह काम जरूर करना। अच्छी-अच्छी फिल्में भी देख सकते हो और कुछ न कुछ नया भी कर सकते हो। कौनजाने तुम्हारे भीतर भी नया कैलेंडर छुपा हो, जो आने वाले हर कैलेंडर की तारीखों को अच्छा बना दे।

तुम्हारा
सतीश अंकल
और भी
योद्धा अकबर
चंद्रशेखर आजाद
वीर (विनायक) सावरकर
छत्रपति शिवाजी महाराज
सरोजिनी 'भारत कोकिला'
राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी