जन्म : 23 जुलाई, 1906 मृत्यु : 27 फरवरी, 1931
चंद्रशेखर आजाद का जन्म मध्यप्रदेश के झाबुआ जिले के भाबरा नामक स्थान पर हुआ। वे 14 वर्ष की आयु में बनारस गए और वहाँ एक संस्कृत पाठशाला में पढ़ाई की।
1920-21 के वर्षों में वे गाँधीजी के असहयोग आंदोलन से जुड़े। वे गिरफ्तार हुए और जज के समक्ष प्रस्तुत किए गए, जहाँ उन्होंने अपना नाम 'आजाद', पिता का नाम 'स्वतंत्रता' और 'जेल' को उनका निवास बताया। उन्हें 15 कोड़ों की सजा दी गई।
हर कोड़े के वार के साथ उन्होंने, 'वन्दे मातरम्' और 'महात्मा गाँधी की जय' का स्वर बुलन्द किया। इसके बाद वे सार्वजनिक रूप से आजाद कहलाए। | | 1920-21 के वर्षों में वे गाँधीजी के असहयोग आंदोलन से जुड़े। वे गिरफ्तार हुए और जज के समक्ष प्रस्तुत किए गए, जहाँ उन्होंने अपना नाम 'आजाद', पिता का नाम 'स्वतंत्रता' और 'जेल' को उनका निवास बताया। उन्हें 15 कोड़ों की सजा दी गई। |
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जब क्राँतिकारी आंदोलन उग्र हुआ, तब आजाद उस तरफ खिंचे और 'हिन्दुस्तान सोशलिस्ट आर्मी' से जुड़े। रामप्रसाद बिस्मिल के नेतृत्व में आजाद ने काकोरी षड्यंत्र (1925) एवं साण्डर्स गोलीकांड (1928) में सक्रिय भूमिका निभाई। अलफ्रेड पार्क, इलाहाबाद में 1931 में उन्होंने रूस की बोल्शेविक क्राँति की तर्ज पर समाजवादी क्राँति का आह्वान किया।
उन्होंने संकल्प किया था कि वे न कभी पकड़े जाएँगे और न ब्रिटिश सरकार उन्हें फाँसी दे सकेगी। इसी संकल्प को पूरा करने के लिए इसी पार्क में उन्होंने स्वयं को गोली मारकर मातृभूमि के लिए प्राणों की आहुति दी। आजाद आजीवन ब्रह्मचारी रहे। आजाद का जन्म स्थान भाबरा अब 'आजादनगर' के रूप में जाना जाता है।
'हमें तो फ्रंटियर से लेकर बर्मा तक, नेपाल से लेकर कराची तक के हर हिन्दुस्तानी को साथ लेकर एक तगड़ी सरकार बनानी है।' -आजाद।
माँ हम विदा हो जाते हैं, हम विजय केतु फहराने आज। तेरी बलिवेदी पर चढ़कर माँ निज शीश कटाने आज॥
मलिन वेश ये आँसू कैसे, कंपित होता है क्यों गात? वीर प्रसूति क्यों रोती है, जब लग खंग हमारे हाथ॥
धरा शीघ्र ही धसक जाएगी, टूट जाएँगे न झुके तार। विश्व कांपता रह जाएगा, होगी माँ जब रण हुंकार॥
नृत्य करेगी रण प्रांगण में, फिर-फिर खंग हमारी आज। अरि शिर गिरकर यही कहेंगे, भारत भूमि तुम्हारी आज॥
अभी शमशीर कातिल ने, न ली थी अपने हाथों में। हजारों सिर पुकार उठे, कहो दरकार कितने हैं॥
- चंद्रशेखर आजाद के वीर रस की काव्य झलकियाँ।
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