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दादा-दादी के अनुभव

प्यारे बच्चों,

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आज क्या ऐसी चीज है जो मैं तुम को बताने वाली हूँ ? कहो..कहो अंदाजा लगाओ। नहीं लगा सके न। चलो मैं ही बताए देती हूँ। मैं बात करने वाली हूँ तुम्हारी दादी के बारे में, तुम्हारे दादा के बारे में।

अब तुम कहोगे कि इन के बारे में क्या बात करनी है ? अच्छा यह बताओ कि जब तुम स्कूल से घर आते हो तो सबसे पहले दादी ही बाहर बैठी मिलती है और वो पूछती है 'आ गया?' और तुम बिना जवाब दिए ही आगे बढ़ जाते हो। फिर तुम खेलकूद में लग जाते हो। उनकी कितनी इच्छा होती है तुम्हें प्यार करने की तुम्हें कुछ किस्से सुनाने की, पर तुम हो कि उनके पास बैठते ही नहीं।
  आज क्या ऐसी चीज है जो मैं तुम को बताने वाली हूँ ? कहो..कहो अंदाजा लगाओ। नहीं लगा सके न। चलो मैं ही बताए देती हूँ। मैं बात करने वाली हूँ तुम्हारी दादी के बारे में, तुम्हारे दादा के बारे में।      


शाम को दादाजी अकेले घूमने जाते हैं और वे उसी मैदान तक जाते हैं जहाँ तुम खेलने जाते हो लेकिन तुम जाते हो दनादन दौड़कर और दादाजी जाते हैं धीरे-धीरे। कभी उनके साथ धीरे-धीरे भी जाकर देखो बड़ा मजा आएगा और वो भी कितना खुश हो जाएँगे। और वे खुद ही तुमसे दौड़कर जाने के लिए कहेंगे।

कभी रात को बैठकर तुम अपने पापा के और बुआ, चाचा वगैरह के किस्से उनको सुनाने के लिए कहो तो तुमको बड़ा मजा आएगा और पता भी चलेगा कि उन्होंने आज इस पद पर पहुँचने के पहले क्या-क्या कष्ट उठाए। इससे तुम्हें बहुत प्रेरणा भी मिलेगी। तुम भी कुछ अपने स्कूल के, दोस्तों के किस्से उन्हें सुनाओ, सुनकर उन्हें बड़ा मजा आएगा और वे तुम्हें बताएँगे भी कि तुम्हें किसी समस्या का सामना कैसे करना है।

अब मैं और क्या बता सकती हूँ कि तुम्हारे दादाजी और दादी तुम्हें क्या-क्या बताएँगे ये तो उनसे बात करने पर ही तुम्हें पता चलेगा। तो चलो, आज से ही उनके पास बैठकर देखो फिर चाहो तो अपने अनुभव मुझसे बाँट भी सकते हो।

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