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हॉर्स पावर की जगह अब डॉग पॉवर
हमारे घर दो कुत्ते हैं- लालू और बुलू। पालतू नहीं हैं, ऐसे ही जंगली हैं, लेकिन घर की रोटी खाकर घर के हो गए हैं। कभी अगवाड़े डोलते रहते हैं तो कभी पिछवाड़े। जरा-सा पुचकारो तो देर तक जोर-जोर से दुम हिलाते रहते हैं। मम्मी कहती है कि काम के न काज के दुश्मन अनाज के। मैंने और भैया ने एक एक्सपेरीमेंट किया। उनकी दुमों से पंखे बाँध दिए और उन्हें पुकारा तो वे दोनों दुम हिलाकर हवा करने लगे। हमारे यहाँ गर्मी खूब होती है और दोपहर में मम्मी सोती है तब बिजली चली जाती है।

वह बहुत परेशान होती है। गर्मी की छुट्टी में मैं घर पर रहूँगी तो लालू-बुलू की दुम से पंखे बाँधकर मम्मी को पंखा झलवाऊँगी। जैसे ही गर्मी से मम्मी की नींद खुलेगी, वह आवाज देगी लालू-बुलू। और लालू-बुलू हवा करने लगेंगे। परंतु पहले तीनों को थोड़ी ट्रेनिंग देना पड़ेगी।
-ऐश्वर्या इंगळे, बुरहानपुर
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