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अनियमित मासिक धर्म
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किशोर अवस्था पार कर नवयौवन में प्रवेश करने वाली नवयुवतियों, नवविवाहिताओं व छोटे शिशुओं की माताओं को भी अनियमित मासिक धर्म की शिकायत रहती है।

यह माह में कभी दो बार या एक-डेढ़ माह में एक बार तक हो सकता है, यानी नियमित नहीं रहता, कभी ज्यादा गरम वस्तु खा ली कि मासिक शुरू हो जाता है।

यह 28 दिन की अवधि में न हो, बहुत थोड़ी मात्रा में हो, कष्ट के साथ हो तो यह अनियमित मासिक धर्म कहलाता है। उपरोक्त वर्णित तकलीफ में यह इलाज करें-

(1) दोनों वक्त आधा कप पानी में अशोकारिष्ट और दशमूलारिष्ट की 2-2 चम्मच दवा डालकर लगातार दो माह या तीन माह तक पीना चाहिए। मासिक धर्म शुरू होने से 2-3 दिन पहले से सुबह दशमूल का काड़ा बनाकर खाली पेट पीना शुरू कर, मासिक स्राव शुरू हो तब तक सेवन करना चाहिए।

(2) श्वेत प्रदर और अनियमित मासिक धर्म की चिकित्सा 4-5 माह तक इस प्रकार करें- भोजन के बाद आधा कप पानी में दशमूलारिष्ट, अशोकारिष्ट और टॉनिक एफ-22 तीनों दवा को 2-2 बड़े चम्मच डालकर दोनों वक्त पीना चाहिए।

(3) 20 ग्राम गन्ने का सिरका रोज रात को सोने से पहले पीने से खुलकर व साफ माहवारी आती है।

(4) अमलतास का गूदा 4 ग्राम, नीम की छाल तथा सोंठ 3-3 ग्राम लेकर कुचल लें। 250 ग्राम पानी में 10 ग्राम गुड़ सहित तीनों सामग्री डाल दें व पानी चौथाई रहने तक उबालें। मासिक की तारीख शुरू होते ही इस काढ़े को सिर्फ एक बार पिएँ । इससे मासिक खुलकर आएगा तथा पीड़ा यदि हो तो दूर होगी।

(5) आयुर्वेदिक दुकान पर मिलने वाली चन्द्रप्रभा वटी की 5-5 गोलियाँ सुबह-शाम कुमारी आसव के साथ कुछ दिनों तक सेवन करने से शरीर में लोहे की कमी दूर होती है, व मासिक नियमित होता है।

दोनों वक्त शौच के लिए अवश्य जाना चाहिए। तले हुए तेज मिर्च-मसालेदार, उष्ण प्रकृति के और खट्टे पदार्थ तथा खटाई का सेवन नहीं करना चाहिए।
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