क्या है कारण उम्र : युवा महिलाओं में यह कभी कभार ही सामने आता है लेकिन उम्रदराज महिलाओं में जैसे ही फीमेल एस्ट्रोजेन हारमोन कम होने लगते हैं पेडू की मांसपेशियों का लचीलापन खत्म होने लगता है वे तेजी से अपनी ताकत भी खोने लगती हैं।
गर्भ एवं बच्चे : जिस महिला को बार-बार गर्भ ठहरता हो और उसके कई बच्चे हों तो उसकी पेडू की मांसपेशियाँ बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो जाती हैं एवं उनमें अपने मूल आकार में लौटने की ताकत नहीं रह पाती।
आनुवांशिक : कई महिलाओं में यह समस्या आनुवांशिक होती है। युवावस्था में ही इन महिलाओं की बच्चेदानी बाहर आने लगती है। आंतरिक नाभि पर लगतार पड़ता दबावः- मोटापे के कारण अथवा फेफड़ों की बीमारियों की वजह से भी बच्चेदानी अपने स्थान से हट जाती है।
क्या हैं लक्षण * पेडू में लगातार भारीपन का एहसास * बार-बार मूत्रत्याग करना * मूत्र को रोक न पाना * जब चाहते हों तब मूत्र त्याग न कर पाना * पीठ के निचले हिस्से में लगातार दर्द रहना * यौन संबंधी समस्याएँ होना * अप्रशिक्षित दाई से डिलेवरी करा लेना * यौन संबंध स्थापित करने में कठिनाई होना
क्या हैं बचाव के उपाय * 40 साल की उम्र के बाद हर महिला को गर्भाशय के स्थानच्युत हो सकने के जोखिम की जानकारी होना चाहिए। * पेडू की मांसपेशियों को चुस्त-दुरुस्त रखने की कसरतें करें। * खूब सारे फल और सब्जियाँ खाएँ ताकि कब्ज न रहे और पाखाने के लिए जोर न लगाना पड़े।
ये कसरत करें * मूत्रत्याग करने के दौरान पेल्विक मसल्स को कई बार सिकोड़ते हुए इसे रोकने की कोशिश करें।
* पेल्विक फ्लोर मसल्स के बारे में 'जानकारी' हो जाने के बाद केवल इसे ही सिकोड़ें न कि पुट्ठे अथवा ग्लूटरल मसल्स को।
फीजियोथेरेपिस्ट से कसरतों के संबंध में जानकारी ली जा सकती है।
क्या है इलाज एक बार किसी महिला की बच्चेदानी बाहर आने की शिकायत होने लगे तो सिर्फ सर्जरी ही एकमात्र उपाय रह जाता है। वजाइनल रिंग भी एक दूसरा विकल्प है।
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