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मातृत्व सुख असंभव नहीं
इन विट्रो फर्टिलाइजेश

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(परखनली शिशु) (आईवीएफ) इन विट्रो फर्टिलाइजेशन का तात्पर्य प्रयोगशाला में अंडों का निषेचन कराने से है। इसके तहत स्त्री के शरीर से अंडे निकालकर उनका मिलाप पति के शुक्राणुओं से कराया जाता है।

सर्वप्रथम स्त्री को माहवारी के 20वें दिन से ऐसे इंजेक्शन दिए जाते हैं, जिनसे उसके शरीर में एक से ज्यादा अंडों का विकास किया जा सके। सोनोग्राफी की मदद से यह जाँच लिया जाता है कि अंडे परिपक्व हुए या नहीं। परिपक्व होने पर इन्हें निकाल लिया जाता है। अंडे निकालने से कुछ घंटे पूर्व स्त्री के पति के वीर्य से अच्छी गुणवत्ता वाले शुक्राणुओं को अलग कर उन्हें अंडों से मिलाकर कल्चर डिश में डाल दिया जाता है। यह डिश इनक्यूबेटर में सुरक्षित रख दी जाती है। निषेचन की प्रक्रिया से बने भ्रूण (एम्ब्रियो) को चार कोशिकाओं के स्तर तक प्रयोगशाला में रखा जाता है। 48 घंटे बाद यह स्तर सुरक्षित व साफ वातावरण में होता है। गर्भधारण की इस प्रक्रिया के पूर्ण होने के दो हफ्ते बाद स्त्री के गर्भवती होने का परीक्षण करवाकर यह सुनिश्चित किया जाता है कि भ्रूण ने सही विकास आरंभ कर दिया है। गर्भधारण की शुरुआत में हार्मोन दिए जाते हैं, ताकि गर्भ बराबर चलता रहे और गर्भपात की आशंका कम हो।

आईसीएसआई (इक्सी)

(इंट्रा साइटोप्लास्मिक स्पर्म इंजेक्शन)

यह टेस्ट ट्यूब बेबी की उन्नत तकनीक है, जिसमें एक शुक्राणु को माइक्रोमेनिप्यूलेटर की मदद से एक अंडाणु में डाला जाता है। यह तरीका
प्रौढ़ महिलाओं में जिनके अंडाणु नहीं बनते हैं, उनमें ओवम डोनेशन द्वारा तथा उन महिलाओं में जिनमें गर्भाशय नहीं है उन्हें सरोगेसी द्वारा संतान सुख की प्राप्ति हो सकती है
जिन पुरुषों में शुक्राणु कम हों, उनकी गति कम हो यह पहले टेस्ट ट्यूब निषेचित न हुआ हो, उनमें भी कारगर है। कुछ पुरुषों के वीर्य में शुक्राणु नहीं होते, मगर उनके जननांग होते हैं। ऐसे लोगों में बायप्सी करके शुक्राणु निकालकर इक्सी किया जाता है। यह तकनीक काफी कारगर सिद्घ हुई है तथा सफलता करीब 20 से 40 प्रतिशत है।


प्रौढ़ महिलाओं में जिनके अंडाणु नहीं बनते हैं, उनमें ओवम डोनेशन द्वारा तथा उन महिलाओं में जिनमें गर्भाशय नहीं है उन्हें सरोगेसी द्वारा संतान सुख की प्राप्ति हो सकती है।

आईयूआई, आईवीएफ तथा इक्सी जैसी प्रगत तकनीकी के चलते संतानहीनता में कई तरह की जाँच तथा इलाज आज के युग में उपलब्ध हैं। सही जानकारी, धैर्य, खर्च करने की क्षमता, मानसिक संतुलन तथा सही समय पर पहल आवश्यक पहलू हैं इस इलाज की सफलता के। सही समय पर फैसला कर लिया जाए और संतानहीनता की पीड़ा से मुक्ति पाने का इरादा कर लिया जाए तो कई तकनीकें हैं, जो शायद आपके आँगन में नन्हे कदमों की आहट के इंतजार को खत्म कर दें।
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