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मातृत्व सुख असंभव नहीं
- डॉ. आशा बक्षी

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संतानहीनता के कई कारण होते हैं। तकनीकी रूप से देखा जाए तो अंडाणु न बन पाना, फैलोपियन ट्यूब खराब होना, शुक्राणु के विकार तथा अन्य। करीब 15 से 30 प्रतिशत तक में कोई कारण नहीं पता चलता, इसे अनजानी निःसंतान कहते हैं। सर्वाधिक आम कारणों में शुक्राणुओं का विकार, फैलोपियन ट्यूब का खराब होना देखने में आता है और करीब 10 से 30 प्रतिशत युगलों के संतानहीनता के एक से ज्यादा कारण रहते हैं। इसके अलावा कुपोषण, तनाव, मोटापा, प्रदूषण आदि भी इस समस्या को बढ़ावा देते हैं। आजकल इस समस्या में बढ़ोतरी होती देखी गई है। देर से शादी, बढ़ते हुए यौन रोग, कार्यक्षेत्र में बढ़ता हुआ रसायनिक प्रदूषण और करियर की दौड़ में गर्भाधान को टालना सभी इस बढ़ोतरी में उत्तरदायी हैं।

हर युगल को मासिक चक्र का ज्ञान होना चाहिए। यदि मासिक धर्म चक्र नियमित (28 से 30 दिन का) हो तो अंडाणु करीब 13 से 16वें दिन तक बनता है। अंडाणु करीब 24 घंटे जीवित रहता है, जबकि शुक्राणु 72 घंटे तक जीवित रहता है। यदि 10वें से 20वें दिन तक एक दिन छोड़कर सहवास किया जाए तो गर्भधारण हो सकता है। एक मासिक चक्र में इस तरह 20 प्रतिशत मौके हैं गर्भधारण के। कई बार हार्मोन की समस्या के कारण भी निःसंतानता हो सकती है। खून में हार्मोन की जाँच एक निर्धारित समय (माहवारी के पहले से पाँचवें दिन) की जाती हैं।

ओव्युलेशन मॉनीटरिं

आंतरिक सोनोग्राफी द्वारा अंडाणु रिलीज होने के समय का पता लगाया जाता है

सुपर ओव्युलेशन

कुछ गोलियाँ तथा इंजेक्शन देने से अंडाणु के बनने में मदद मिलती है। ये इंजेक्शन काफी महँगे होते हैं। इस इलाज से एक से अधिक बच्चा होने की संभावना करीब 15-10 प्रतिशत रहती है।

आईयूआई (इंट्रा युटेराइन इनसेमिनेशन)

यह एक सरल तथा काफी असरकारक इलाज है। जब अंडाणु विकसित होकर रिलीज होने वाला होता है। ऐसे समय पर शुक्राणुओं को अत्याधुनिक तरीकों से पतली-सी नली द्वारा गर्भाशय में प्रवेश कराया जाता है। इस तरह निषेचन (फर्टिलाइजेशन) हो जाता है।
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