प्रश्न : मासिक ऋतु स्राव के दिनों में सहवास किया जा सकता है या नहीं ?
उत्तर : करने को तो जो मन में आए सो किया जा सकता है पर इन दिनों में एक तो स्त्री बड़ी असुविधा और अरुचि का अनुभव करती है सो यौन क्रिया में मन से साथ नहीं दे सकती, दूसरे रक्त स्राव होने से योनि मार्ग भी शुद्ध और स्वाभाविक स्थिति में नहीं होता, इसीलिए संयम और इंद्रिय निग्रह से काम लेकर इन 5-6 दिनों में सहवास न करना ही अच्छा है, क्योंकि यदि मनमानी करके करता भी है तो यह कार्य संभोग नहीं, बलात्कार करने के बराबर ही होगा।
प्रश्न : मासिक ऋतु में स्राव के दिनों में रोजाना स्नान करना चाहिए या नहीं ?
उत्तर : स्नान न करके स्पंज करके शरीर शुद्धि कर ली जाए तो अच्छा है, अगर स्नान करना ही हो तो कुनकुने गर्म पानी से ही करना चाहिए, ठण्डे पानी से नहीं, फिर भले ही दिन ग्रीष्म ऋतु ही क्यों न हो। इन 4-5 दिनों में शरीर पर शीतलता का असर होने से ऋतु स्राव में बाधा पड़ती है।
प्रश्न : तनाव और सेक्स में क्या संबंध है ?
उत्तर : आपने कभी इस तथ्य पर ध्यान दिया कि तनाव जितना कम होगा, सेक्स की जरूरत भी उतनी ही कम मालूम देगी और जितना तनाव बढ़ेगा उतना ही सेक्स जरूरी मालूम पड़ने लगेगा। तनावयुक्त व चिन्ताग्रस्त व्यक्ति ज्यादा कामुक और उत्तेजित रहते हैं। जहां जितना टेन्शन है, जितनी चिन्ता और भागदौड़ है उतनी ही सेक्सुअलिटी बढ़ी हुई है। बचपन और बुढ़ापा, काल के योग से तनावरहित होता है अतः इस काल में सेक्सुअलिटी भी नहीं होती। चित्त जितना शान्त और तनावरहित स्थिति में रहेगा, उतना ही कामुकता से दूर रहेगा। जितना कामुकता से दूर रहेगा उतना ही ऊर्जा को नष्ट होने से बचाए रख सकेगा, क्योंकि 'काम' से उतनी ऊर्जा नष्ट नहीं होती, जितनी 'कामुक' बने रहने से होती है।
प्रश्न : मानसिक यौन चिंतन, मानसिक तृप्ति व अतृप्ति में क्या संबंध है ?
उत्तर : मानसिक यौन चिन्तन करते रहने वाले को अतृप्ति होगी ही, क्योंकि यथार्थ और कल्पना में जमीन-आसमान का फर्क होता है। खयाली पुलाव पकाने वाले शेखचिल्ली की तरह कल्पना में इतना कुछ सोच लेते हैं, इतने ऊंचे मन्सूबे बनाने के आदि हो जाते हैं कि उस स्तर तक वास्तविक जीवन में कर पाना सम्भव नहीं होता। मानसिक यौन चिन्तन करने वाला मनचाही कल्पनाओं में जितना व जैसा चाहता है, उतना सोचता रहता है पर वास्तविक जीवन से उतना कर नहीं पाता, कर सकता भी नहीं, लिहाजा वह अतृप्ति का अनुभव करता है और हीनता की भावना का शिकार हो जाता है।
|