स्तन कैंसर भारतीय महिलाओं में दूसरा सबसे अधिक पाया जाने वाला कैंसर है। ग्रामीण महिलाओं की अपेक्षा शहरी महिलाओं में यह जानलेवा रोग अधिक पाया जाता है। इसी तरह शहरी समाज की उच्च वर्ग की महिलाओं में स्तन कैंसर के मामले अधिक संख्या में देखे जा रहे हैं। पारसी समाज की महिलाओं में स्तन कैंसर के मामले अधिक होते हैं। एक अध्ययन से यह ज्ञात हुआ है कि एक लाख शहरी महिलाओं में से 22-28 को स्तन कैंसर पाया गया है जबकि ग्रामीण महिलाओं में केवल 6 ही इस रोग से ग्रस्त पाई गई हैं।
स्तन कैंसर को सायलेंट किलर माना जाता है क्योंकि यह चुपचाप हमला करता है। आरंभिक अवस्था में ही रोग की पहचान होने से जान का जोखिम कम होता है।
देश में स्तन कैंसर के मामलों में तेजी से इजाफा हो रहा है। हर 22 में से एक भारतीय महिला को स्तन कैंसर पाया जा रहा है। उम्र के साथ स्तन कैंसर की आशंका भी बढ़ती जाती है। जिस मरीज की माँ, मौसी या बहन को कैंसर हो तो उसे कैंसर होने की आशंका 24 गुना अधिक होती है।
आमतौर पर देखा गया है कि जिस महिला की बड़ी उम्र में शादी हो और उसका पहला बच्चा देर से पैदा हुआ हो तो उसे स्तन कैंसर की आशंका अधिक होती है। इसी तरह जिन महिलाओं को मासिक धर्म जल्दी शुरू हो जाता है और बड़ी उम्र तक जारी रहता हो उन महिलाओं को दूसरों की अपेक्षा कैंसर होने का खतरा होता है।
स्तन कैंसर के कई प्रारंभिक लक्षण हैं जो पहले से ही दिखाई देने लगते हैं लेकिन कई बार महिला इन्हें नजरअंदाज कर देती है। स्तन कड़क होना, स्तन की त्वचा पर ग़ढ्ढे बनना, उसके आकार में परिवर्तन होना, घाव होना, निप्पल का अंदर की ओर धँस जाना, रक्तस्त्राव होना, बगल में गठान हो जाना और हाथ में सूजन आ जाना कुछ ऐसे प्रारंभिक लक्षण हैं जो स्तन कैंसर की ओर संकेत करते हैं। महिलाएँ स्वयं इन लक्षणों को देख सकती है। इसलिए आवश्यक है कि वे महीने में कम-से-कम एक बार अपनी जाँच स्वयं करें। और जरा भी शंका हो तो तुरंत अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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