बच्चा पैदा करने के लिए सिर्फ एक बलशाली शुक्राणु की जरूरत होती है, जो स्त्री के अंडाणु से संयोग कर गर्भ में परिवर्तित होता है। वीर्य में शुक्राणुओं की कमी होने या शुक्राणु कमजोर होने पर बच्चे पैदा करने में परेशानी होती है।
चिकित्सा शुक्राणुओं को बढ़ाने व उन्हें बलशाली बनाने के लिए इस प्रकार का प्रयोग करें- इसके लिए शतावरी, गोखरू, बड़ा बीजबंद, बंशलोचन, कबाब चीनी, कौंच के छिलकारहित बीज, सेमल की छाल, सफेद मुसली, काली मुसली, सालम मिश्री, कमल गट्टा, विदारीकंद, असगन्ध सब 50-50 ग्राम और शक्कर 300 ग्राम, सभी द्रव्यों को अलग-अलग कूट-पीसकर कपड़छान कर लें।
शक्कर को भी पीसकर महीन कर लें और सभी को मिला लें व तीन बार छान लें, ताकि एक जान हो जाएं। सुबह-शाम एक-एक चम्मच चूर्ण मीठे दूध के साथ 60 दिन तक सेवन करें और इसके बाद वीर्य की जाँच करवाकर देख लें कि शुक्राणुओं में क्या वृद्धि हुई है।
पर्याप्त परिणाम न मिलने तक प्रयोग जारी रखें। यह नुस्खा शीघ्रपतन, स्वप्नदोष, नपुंसकता आदि बीमारियों में भी लाभ करता है।
प्रयोगशाला में भी तैयार किए जा सकेंगे शुक्राणु
एक समाचार के अनुसार जापानी वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि अब वे प्रयोगशाला में शुक्राणु (स्पर्म) को उगा सकते हैं। इस उपलब्धि के चलते उन संतानहीन पुरुषों में आशा की किरण जागी है, जो शुक्राणुहीनता की वजह से पिता बनने में सक्षम नहीं हैं।
इस नवविकसित तकनीक के चलते अब वे आनुवंशिक (जेनेटिक) रूप से बच्चे के पिता बन सकेंगे। उक्त खोज से जुड़े टोकियो (जापान) के एक जिला माचिंडा के वैज्ञानिक दल का यह विश्वास है कि अब वे पुरुष कोशिकाओं में इस तरह की 'रिप्रोग्रामिंग' करने में सफल हो सकेंगे कि कोशिकाओं को स्त्री डिम्बों को भी उत्पन्न करने में सक्षम हो सकें।
यदि ऐसा हो गया तो एक ही पुरुष मां और बाप दोनों बन सकेगा। इस तकनीक के आम हो जाने पर समलैंगिक पुरुषों का भी 'मां' बनने का ख्वाब सच हो सकेगा। हालांकि यह अजूबा प्रयोग अभी चूहों पर ही किया गया है। वैज्ञानिक बड़ी शिद्दत से इस तकनीक को प्रौढ़ पुरुषों पर आजमाने की योजना बना रहे हैं।
उक्त खोज से जुड़े मित्सुबिशि कासेई इंस्टिटयूट के पोशियाकी नोज नामक वैज्ञानिक ने प्रेस को बताया कि सबसे पहले उन्होंने गर्भाधान के शुरुआती दिनों में ही भू्रण में पूर्व इच्छित 'स्टेम' कोशिकाएं तैयार कीं। फिर इन नवविकसित कोशिकाओं को शरीर के विभिन्न हिस्सों में विकसित होने के लिये 'प्रोग्राम्ड' किया।
इसके बाद उन कोशिकाओं को अंडग्रन्थियों में 'इम्पलांट' करने से पहले प्रयोगशाला में शुक्राणु (स्पर्म) के रूप में संवर्द्धित किया। फिर अध्ययन करने से पता चला कि आनुवंशिक रूप से वे सामान्य हैं। खबर है कि स्टेम सेल से उत्पन्न शुक्राणु ठीक उसी तरह के थे, जैसे कि अंडग्रन्थियों से उत्पन्न शुक्राणु होते हैं।
इन शुक्राणुओं और कुदरती रूप से उत्पन्न हुए शुक्राणुओं में जरा सा भी फर्क नहीं था पर अब वैज्ञानिकों को यह परीक्षण करना है कि ये शुक्राणु सामान्य डिम्बाणुओं को निषेचित कर सकते हैं या नहीं।
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