यौन रोगों में कठिन रोग है- उपदंश (सिफलिस), जिसकी शीघ्र चिकित्सा न की गई, तो इसका विस्तार बहुत तेजी से बढ़ता है और अंत में यौनांग गलकर नष्ट होने लगता है। यह संक्रामक रोग (छूत का रोग) है। इसके लक्षण एक से चार सप्ताह के बीच प्रकट होते हैं। यह रोग बहुत मुश्किल से ही ठीक होता है।
उपदंश में लिंगेन्द्रिय के बाहरी भाग सुपारी (शिश्नमुंड) पर फुंसियाँ और घाव होते हैं, जिनसे चेप (स्राव) निकलता रहता है। इस रोग में बहुत ज्यादा पीड़ा होती है। यदि साफ-सफाई न की जाए और उचित चिकित्सा न की जाए तो यह रोग पूरे यौनांग को घाव से भर देता है। कुछ लोग उपदंश को गरमी बढ़ने के कारण हुआ रोग भी मानते हैं।
चिकित्सा विज्ञान के अनुसार यह रोग पैतृक प्रभाव से होता है या ट्रेपोनेमा पेलीडम नामक जीवाणु का शरीर में प्रवेश करने से होता है। अप्राकृतिक तरीके से किए गए मैथुन से भी यह रोग होता है।
कारण : यह रोग शिक्षित एवं समझदार वर्ग में कम और अशिक्षित एवं ग्रामीण वर्ग में ज्यादातर पाया जाता है। जननेन्द्रिय की साफ-सफाई न करने, वेश्यागमन या परस्त्रीगमन करने, अविवेकपूर्ण ढंग से सम्भोग करने, लिंग में रगड़, नाखून या कठोर वस्तु से कट लगने, स्त्री के ऋतुकाल (मासिक धर्म के दिन) में सहवास करने आदि कारणों से यह रोग हो जाता है। कभी-कभी वंशानुगत कारण से भी इस रोग के रोगी माता-पिता की संतान को भी यह रोग हो जाता है।
लक्षण : पुरुष जननेन्द्रिय के मुण्ड (अग्रभाग) पर लाल रंग की एक फुंसी उठती है। 5-7 दिन बाद यह फूट जाती है और वहां घाव बन जाता है। इसमें पीड़ा कम होती है और दबाने से नरम मालूम पड़ती है। इसका स्राव भी दूषित होता है और शरीर पर जहां लगता है, वहीं नया घाव हो जाता है।
जब यह रोग पुराना हो जाता है, तब सारे शरीर पर लाल-लाल चकते और घाव हो जाते हैं। शरीर से एक विशिष्ट प्रकार की गंध आती रहती है। लापरवाही करने पर जब स्थिति और बिगड़ती है तो जननेन्द्रिय गलने लगती है, रक्त विकार और वात प्रकोप बढ़ जाते हैं।
गलत ढंग से यानी अनुचित यौनाचार करने वाला जब उपदंशग्रस्त स्त्री के संपर्क में आता है, तब 2-4 दिन बाद ही यह फुंसी उठ आती है। प्रारंभिक अवस्था में इसकी चिकित्सा सरलता से हो जाती है पर जैसे-जैसे रोग पुराना होता है, वैसे-वैसे कठिन साध्य और अन्त में असाध्य हो जाता है। इस गंभीर रोग का इलाज किसी अनुभवी चिकित्सक से कराएं, यहां प्रारंभिक अवस्था को कुछ हद तक ठीक करने की चिकित्सा दी जा रही है।
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