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शीघ्रपतन, धातु क्षीणता व धातु स्राव
आज का तड़क-भड़क वाला फैशनेबल वातावरण, अधनंगे अश्लील दृश्य और कामुक भाव से भरे टीवी सीरियल आदि इस समस्या में घी डालने का काम कर रहे हैं। आज वह युवक भाग्यवान है और काबिले तारीफ है, जो धातु क्षीणता का रोगी नहीं है। ऐसा युवक वही हो सकता है जो वातावरण से प्रभावित न होकर शुद्ध और हितकारी आचार-विचार का पालन करता हो।

शुक्र धातु का आचार-विचार से सीधा संबंध रहता है, इसलिए आचार-विचार शुद्ध नहीं होगा तो धातु क्षीण होगी ही। धातु क्षीणता से स्मरण शक्ति में कमी होती है, नपुंसकता आती है, आत्मविश्वास में कमी होती है, बुद्धि मंद और शरीर में निर्बलता आती है। विवाहित पुरुष, पत्नी सहवास में असफल रहता है। कामुक आचार-विचार का सर्वथा त्यागकर निम्नलिखित चिकित्सा करने पर दो-तीन माह में धातु क्षीणता दूर हो सकती है। धातु को पुष्ट और बलवान बनाने वाले उत्तम आयुर्वेदिक योगों का परिचय यहां प्रस्तुत है।

चिकित्स
(1) आंवला, गिलोय सत्व, असली बंसलोचन, गोखरू, छोटी इलायची सब 20-20 ग्राम लेकर बारीक पीसकर चूर्ण कर लें। यह चूर्ण 1-1 चम्मच सुबह-शाम मीठे दूध के साथ लें।

(2) सकाकुल मिश्री 80 ग्राम, बहमन (सफेद), बहमन लाल, सालम पंजा, सफेद मुसली, काली मुसली और गोखरू सब 40-40 ग्राम। छोटी इलायची के दाने, गिलोय सत्व, दालचीनी और गावजुवां के फूल सब 20-20 ग्राम, इन सबको कूट-पीसकर महीन चूर्ण करके तीन बार छान लें, ताकि सभी एक जान हो जाएं फिर शीशी में भर लें। यह चूर्ण आधा-आधा चम्मच कुनकुने मीठे दूध के साथ सुबह व रात को सोते समय लें।

(3) जिनकी पाचन शक्ति बहुत अच्छी हो वे धुली हुई उड़द की दाल और पुराने चावल की खिचड़ी बनाकर इसमें शुद्ध घी डालकर प्रतिदिन शाम को भोजन की जगह कम से कम 40 दिन तक खाएं। इसका प्रत्येक कौर तब तक चबाते रहें, जब तक यह खुद ही हलक में उतरकर पेट में चली न जाए, इसे निगलना न पड़े। इसके साथ घूंट-घूंटकर मीठा दूध पीते रहें या खाने के बाद पी लें। इसकी मात्रा शुरू में अपनी पाचन शक्ति से थोड़ी कम रखें, फिर प्रतिदिन थोड़ी-थोड़ी मात्रा बढ़ाते जाएं। इसे चबाकर बारीक करना इसलिए जारूरी है, ताकि हमारे मुंह की लार पर्याप्त मात्रा में इसमें मिल सके, जो पाचन में बहुत सहायक होती है।

(4) शकर के एक बताशे में गूलर के पत्ते का दूध 8-10 बूंद टपकाकर खाएं। सुबह सूर्योदय के समय या पहले पत्ता तोड़ें तो दूध अच्छी मात्रा में निकलेगा। बताशा खाकर ऊपर से मीठा दूध पिएं। उपरोक्त चारों नुस्खे एक से बढ़कर एक हैं। कोई भी एक या दो नुस्खे तीन माह तक निरंतर प्रयोग करें।

(5) कौंच के शुद्ध किए हुए बीज, काकोली, असगन्ध, शतावर, क्षीर काकोली और तालमखाना सब 50-50 ग्राम और 200 ग्राम मिश्री। सब को कूट-पीसकर महीन चूर्ण करके मिला लें और 1-1 चम्मच सुबह खाली पेट और रात को सोते समय एक गिलास मीठे कुनकुने गर्म दूध के साथ तीन माह तक सेवन करें। शुक्र धातु को पुष्ट और गाढ़ा करने वाला यह अद्भुत नुस्खा बहुत ही गुणकारी है।

(6) अश्वगन्धा, शतावर और गोखरू तीनों 100-100 ग्राम लाकर खूब कूट-पीसकर महीन चूर्ण कर मिला लें और शीशी में भरकर रख लें। इस चूर्ण को 5-5 ग्राम मात्रा में सुबह-शाम शहद में मिलाकर चाट लें। शहद इतना लें कि चूर्ण भलीभांति मिल जाए। इसके ऊपर एक गिलास मीठा और बिल्कुल ठंडा किया हुआ दूध पी लें। यह प्रयोग सुबह खाली पेट और रात को सोते समय यानी भोजन के दो घंटे बाद करें। खटाई का सेवन न करें।
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