टेर्नेरा (डेमियाना) : मदर टिंचर (मूल अर्क) की 15-20 बूंदें आधा कप पानी में डालकर घोल लें। यह एक खुराक है। ऐसी एक खुराक सुबह और शाम को 3-4 माह तक नियमित रूप से सेवन करना चाहिए। शुक्राणुओं की वृद्धि करने, नपुंसकता कम करने, ध्वजभंग की स्थिति, अन्य प्रकार की यौन दौर्बल्यता आदि में यह दवा लाभ करती है। जिस प्रकार आयुर्वेद में कौंच पाक, मुसली पाक, अश्वगन्धा पाक आदि हैं, उसी प्रकार होम्योपैथिक में यह दवा है।
कोनियम : ग्लैंड पर इस दवा का विशेष प्रभाव पड़ता है। अंडकोष में प्रदाह होना, स्नायविक दुर्बलता, कामोत्तेजना न होना। अंडकोष में प्रदाह होने से शुक्राणु के निर्माण में बाधा आती है। सुन्नपन और स्नायविक दुर्बलता से नपुंसकता आती है अतः इस दवा से लाभ होता है। कोनियम 200 शक्ति की 8-10 गोली सप्ताह में सिर्फ एक बार किसी भी दिन निश्चित कर ले लेना चाहिए, इस दिन अन्य कोई दवा नहीं लेना चाहिए। लाभ होने तक प्रति सप्ताह एक खुराक लेते रहना चाहिए। यौनांग तक शुक्राणु किसी कारण से न पहुंच पा रहे हों तो बात जुदा है, वरना यह दवा शुक्राणुओं की कमजोरी दूर कर देती है।
एग्नस कैस्टस : इस दवा की 30 शक्ति वाली 6-7 गोली सुबह-शाम चूसें।
एसिड फॉस : इसे फास्फोरिक एसिड भी कहते हैं। भोजन के आधा घंटे बाद इस दवा के मूल अर्क की 20 बूंद आधा कप कुनकुने गर्म पानी में डालकर पीना चाहिए।
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