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पुरुष बन्ध्यत्व (बांझपन)
विशेष : इस संबंध में हम पिछले चेप्टर्स में आयुर्वेदिक तरीके से इलाज करने के तरीके बता चुके हैं। अब यहां कुछ होम्योपैथिक तरीके से इलाज का तरीका व दवाई का नाम बता रहे हैं। होम्योपैथिक चिकित्सा भी इस विषय विशेष में अच्छा दखल रखती है व बीमारी के उपचार में सहायता करती है।

हमारे वेबदुनिया के सेहत चैनल में होम्योपैथिक चिकित्सा नाम से होम्योपैथिक के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई है। आप संबंधित लिंक पर क्लिक कर सकते हैं। होम्योपैथिक दवा लेने के आधा घंटा पहले व खाने के आधा घंटे बाद तक कुछ भी खाना-पीना नहीं चाहिए। एक दवा से दूसरी दवा लेने के बीच एक घंटे का अंतर रखना चाहिए। दवा लेते समय पेट खाली होना चाहिए। होम्योपैथिक दवा सेवन के दौरान खुशबू वाले पदार्थों व कॉफी का सेवन नहीं करना चाहिए।

गर्भाधान के लिए पुरुष के शुक्र में शुक्राणुओं का होना जरूरी होता है, बल्कि पर्याप्त मात्रा में होना जरूरी होता है। यदि शुक्राणु बिलकुल ही न हों तो इस स्थिति को शुक्राणुहीनता कहा जाएगा, जिसे अंगरेजी में अजोस्पर्मिया कहते हैं। यदि शुक्रणु हों पर पर्याप्त मात्रा में मौजूद न हों तो भी गर्भाधान नहीं हो सकता।

इस शुक्राणु अल्पता वाली स्थिति को ओलिगोस्पर्मिया कहते हैं, पुरुष में बन्ध्यत्व के ये ही दो कारण होते हैं। शुक्राणुओं का बिल्कुल ही न होना जन्मजात भी हो सकता है और बाद में भी यह स्थिति किसी कारण से बन सकती है।

शारीरिक संरचना से संबंधित कारणों में क्रोमोसोम का असामान्यता होना, जैसे कि क्लिनफिल्टर्स सिंड्रोम, जिसमें एक एक्स क्रोमोसोम अतिरिक्त रूप में पाया जाता है, वृषण के नीचे अंडकोष की थैली में न उतरना, शुक्राणुओं का निर्बल तथा गति शक्ति से हीन होना, शुक्र धातु का विकारयुक्त व पुष्ट न होना, शुक्रवाहिनी नली का न होना, गलसुआ रोग से भी शुक्राणुओं में कमी आती है।
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