स्तनों में दूध हेतु : सद्य प्रसूता या शिशु को दूध पिलाने वाली स्त्री के स्तनों में दूध पर्याप्त मात्रा में न आता हो तो शतावरी चूर्ण रात को 5 से 10 ग्राम मात्रा में फाँक कर ऊपर से दूध पीना और दूध-दलिया खाना चाहिए।
सूखी खाँसी : जच्चा-बच्चा को यदि खाँसी हो तो शतावरी चूर्ण, अडूसा के पत्ते और मिश्री समान मात्रा में कूट-पीसकर मिला लें। 10 ग्राम चूर्ण को एक गिलास पानी में उबालकर काढ़ा बना लें। इसे दिन में 3-4 बार 2-2 चम्मच प्रसूता पिए और 5-5 बूंद शिशु को अपने दूध में मिलकार पिलाएँ। इससे सूखी खाँसी में आराम होता है।
विविध प्रयोग : पित्त प्रकोप और अजीर्ण होने पर इसका 5 ग्राम चूर्ण शहद में मिलाकर सुबह-शाम चाटना चाहिए।
* घी में चूर्ण मिलाकर सुबह-शाम चाटकर दूध पीने से शारीरिक थकान, कमजोरी, अनिद्रा, पेशाब में रुकावट, धातुक्षीणता आदि विकार नष्ट होते हैं।
* वात प्रकोप होने पर शतावरी चूर्ण और पीपर का चूर्ण सम भाग मिलाकर 5 ग्राम मात्रा में शहद के साथ सुबह-शाम चाटने से लाभ होता है।
* कफ प्रकोप और खाँसी में शतावरी पाक स्त्री-पुरुष दोनों के लिए बलपुष्टिदायक होता है, अतः इस पाक का सेवन आवश्यकता के अनुसार ही करना चाहिए।
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