बालकों को ज्वर : अतीस का चूर्ण 1-1 रत्ती, दिन में तीन बार शहद में मिलाकर चटाएँ। शिशु को माता के दूध में मिला कर दें। ज्वर के साथ जुकाम, उलटी और बार-बार पतले दस्त लगना आदि शिकायतें भी ठीक होती हैं।
ज्वर : बड़ी आयु वाले स्त्री-पुरुष या प्रसूता स्त्री को ज्वर हो तो विषम ज्वर में, ज्वर को रोकने और बूढ़े हुए ज्वर को उतारने के लिए अतीस का चूर्ण 1-1 रत्ती, गर्म पानी के साथ सुबह-शाम दें।
आमातिसार : अतीस कटु और पौष्टिक होती है, अतः आमातिसार रोग के लिए उपयोगी सिद्ध होती है। दस्त में आम (आंव) जाता हो, पतला दुर्गंधयुक्त दस्त बार-बार होता हो, मल का रंग सफेद हो तो अतीस और सोंठ का महीन पिसा चूर्ण 2-2 ग्राम, अतीस की फाण्ट के साथ दिन में तीन बार लेना चाहिए। बालकों को ऐसी व्याधि हो तो अतीस का सेवन 1-1 रत्ती मात्रा में देने से मल का रंग पीला हो जाता है। आम का पाचन होने लगता है, जिससे मल विसर्जन ठीक समय पर और ठीक तरह से होने लगता है और अतिसार होना बंद हो जाता है, दस्तों की दुर्गंध दूर हो जाती है।
संग्रहणी : पाचनशक्ति बिल्कुल काम न करती हो, बार-बार पतले और बदबूदार दस्त लगते हों और मल के साथ, आहार पदार्थों के टुकड़े निकलते हों तो अतीस, सोंठ और इन्द्र जौ-इन तीनों को 20-20 ग्राम लेकर खूब बारीक चूर्ण कर लें। यह चूर्ण 3 ग्राम एक गिलास चावल के धोवन के साथ सुबह-शाम दें।
उदर कृमि : बच्चों के पेट में छोटे-छोटे कृमि हो गए हों तो अतीस और वायविडंग का महीन पिसा चूर्ण मिलाकर शीशी मे भर लें। यह चूर्ण 2-2 रत्ती सुबह-शाम शहद में मिलाकर या दूध के साथ बच्चे को दें। तीन दिन यह प्रयोग करने के बाद चौथे दिन सोते समय एक कप गरम दूध में एक चम्मच एरण्ड तैल डालकर पिलाने से कृमि मल के साथ निकल जाते हैं। कृमि के कारण यदि बच्चे को बुखार, खांसी और रक्त की कमी की भी शिकायत हो तो ये व्याधियां भी समाप्त हो जाती हैं।
बच्चों में अग्निमांद्य : बच्चों को मंदाग्नि होने पर वे दूध कम पीते हैं, पतला दुर्गंध युक्त दस्त होता है, बच्चे सुस्त बने रहते हैं, पेट में दर्द होता रहता है, जिससे बच्चा अकसर रोता रहता है। इस व्याधि को दूर करने के लिए अति विषादि वटी 1-1 गोली सुबह-शाम पानी के साथ देते रहने से बच्चा फुर्तीला, सशक्त और स्वस्थ हो जाता है।
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