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शंखपुष्पी
यह तेल बच्चों के शरीर और स्वास्थ्य के लिए बहुत गुणकारी है। विशेषकर सूखा रोग से ग्रस्त बच्चे के लिए इस तेल की मालिश बहुत लाभप्रद सिद्ध होती है। यह तेल रक्तवर्द्धक, मांस को पुष्ट करने वाला, दुबलापन मिटाने वाला और त्वचा को कांतिपूर्ण बनाने वाला है। ज्वर और दुर्बलता नष्ट करने वाला है। यह तेल बना-बनाया आयुर्वेदिक औषधि विक्रेता के यहां मिलता है।

शंखपुष्पी वटी : शंखपुष्पी व असगन्ध 100-100 ग्राम। ब्राह्मी, मुलहठी, गिलोय, शतावरी, भृंगराज, वचा सब 50-50 ग्राम। स्मृतिसागर रस, स्वर्णमाक्षिक भस्म, ज्योतिष्मती रसायन सब 25-25 ग्राम।

भावना द्रव्य : बला व कूठ 100-100 ग्राम और आमलकी रसायन 25 ग्राम। इन भावना द्रव्यों को मिलाकर जौकुट करके दो लीटर पानी में उबालें। जब पानी एक लीटर बचे तब उतारकर कपड़े से छान लें और इस पानी को फिर उबालें। जब पानी 250 मि.ली. बचे, तब उतारकर ठंडा कर लें। सब द्रव्यों को अलग-अलग कूट-पीसकर खूब महीन चूर्ण कर मिला लें और 250 मि.ली. बचा पानी इस मिश्रण में इस तरह से मिलाएं कि घोल गाढ़ा रहे। इस घोल को खरल में डालकर खूब घुटाई करके 2-2 रत्ती की गोलियां बना लें। गोलियों को खूब अच्छी तरह सुखाकर शीशी में भर लें। यह शंखपुष्पी वटी है।

बड़ी आयु वालों को 2-2 और बच्चों को 1-1 वटी (गोली) सुबह-शाम दूध के साथ 4-5 माह तक सेवन करना चाहिए। यह वटी छात्र-छात्राओं के लिए और जो वयस्क स्त्री-पुरुष दिमागी काम करते हैं, उनके लिए विशेष रूप से उपयोगी व गुणकारी है। यह वटी इसी नाम से बनी बनाई बाजार में मिलती है।
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और भी
अशोक एवं अशोकारिष्ट
अश्वगन्धा (असगंध) : अमृततुल्य जड़ी
मुलहठी : गले हेतु उत्तम
जायफल : उपयोगी जड़ी-बूटी