प्रजनन शक्ति : डिम्ब की निर्बलता से कुछ स्त्रियां गर्भ धारण नहीं कर पातीं। ऐसी स्त्रियों को मासिक ऋतुस्राव शुरू होने के 3 दिन बाद से यह नुस्खा 7 दिन तक सेवन करना चाहिए- दस ग्राम असगन्ध जरा से घी में, मन्दी आंच पर अच्छे से सेक लें, फिर एक गिलास उबलते दूध में डालकर 15-20 मिनट तक उबालें। इसके बाद उतार लें। इसमें मिश्री मिलाकर सुबह के समय खाली पेट कुनकुना गर्म पी लें। इस प्रयोग को लाभ होने तक प्रति मास 7 दिन तक इसी ढंग से सेवन करते रहना चाहिए।
आधासीसी : असगन्ध की ताजी जड़ लें। ताजी जड़ न मिले तो सूखी जड़ को 1-2 घंटे पानी में डालकर रखें। चन्दन की तरह इस जड़ को पत्थर पर घिसकर माथे पर लेप करें। सुबह शाम असगन्ध का चूर्ण 1-1 चम्मच दूध के साथ लें। आधासीसी का दर्द दूर हो जाएगा।
आयुर्वेदिक योग
अश्वगन्धादि चूर्ण : असगन्ध और विधारा के चूर्ण को समान मात्रा में मिलाकर यह योग बनाया जाता है। इस चूर्ण को 1-1 चम्मच सुबह-शाम कुनकुने गर्म मीठे दूध के साथ 3-4 माह तक सेवन करना चाहिए। शीतकाल के दिनों में तो इसका सेवन अवश्य करना चाहिए। इसके सेवन से स्नायविक दौर्बल्य, दिमागी कमजोरी, थकावट, शारीरिक निर्बलता, दुबलापन, वात प्रकोप, यौन शक्ति की कमी आदि व्याधियां नष्ट होती हैं। इसे किसी भी आयु के स्त्री-पुरुष सेवन कर सकते हैं। यह इसी नाम से बाजार में मिलता है।
अश्वगन्धादि गुग्गुल : यह योग आमवात की शिकायत दूर करता है। इसकी 2-2 गोली सुबह-शाम, पानी के साथ लेना चाहिए। इसके सेवन से उदरवात, उदरशूल, उदरकृमि और मलावरोध आदि व्याधियां नष्ट होती हैं।
अश्वगन्धारिष्ट : यह सुबह-शाम भोजन के बाद, आधा कप पानी में 2-2 चम्मच अश्वगन्धारिष्ट डालकर पीना चाहिए। यह स्त्री-पुरुष, युवा-प्रौढ़-वृद्ध सबके लिए एक जनरल टॉनिक का काम बखूबी करता है। शरीर को पुष्ट और सबल बनाने के लिए यह उत्तम योग है
अश्वगन्धादि योग : असगन्ध और विधारा 80-80 ग्राम, बड़ी इलायची का चूर्ण और कुक्कुटाण्डत्वक भस्म 20-20 ग्राम, वंग भस्म 10 ग्राम और पिसी मिश्री 100 ग्राम- सबको महीन चूर्ण कर मिला लें और शीशी में भर लें। इसे आधा-आधा चम्मच (लगभग 3-4 ग्राम) दूध के साथ लें। यह चूर्ण स्त्रियों का परम मित्र योग है जो श्वेत प्रदर रोग दूर कर स्त्रियों के शरीर को सबल, सुडौल और पुष्ट बनाता है। यह बना बनाया बाजार में नहीं मिलता इसलिए बनाएं और सेवन कर लाभ उठाएं।
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