खूबसूरती पाने के लिए अब किसी को अपने शरीर की सर्जरी कराने से भी परहेज नहीं रहा। नाक को तीखी कराने और त्वचा को कसावट देने के लिए देश में बढ़ी प्लास्टिक सर्जरी के आँकड़ों से तो कम से कम यही साबित होता है।
हालाँकि देश में प्लास्टिक सर्जरी के संबंध में कोई आधिकारिक आँकड़े उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन अस्पतालों के रिकॉर्ड बताते हैं कि राइनोप्लास्टी (नाक को खूबसूरत बनाने के लिए की जाने वाली सर्जरी) और 'लिपोसक्शन' (शरीर के विभिन्न स्थानों से फैट कम करने के लिए सर्जरी) के मामलों में पिछले पाँच सालों में 150 प्रतिशत का इजाफा हुआ है।
इसके अलावा मोटापा कम करने के लिए पेट की सर्जरी और पुरूषों में वक्ष के उभार में कटौती के लिए की जाने वाली सर्जरी भी खासी लोकप्रिय है। विशेषज्ञों के मुताबिक इसके अलावा बिना सर्जरी के सौंदर्य इजाफे के लिए भी कई तकनीकों को इन दिनों लोकप्रियता मिली हुई है। इनमें बोटोक्स इंजेक्शन और माइक्रोडर्माब्रेजन मुख्य हैं। माइक्रोडर्माब्रेजन तकनीक के तहत माइक्रोक्रिस्टल स्प्रे के उपयोग से सबसे बाहरी, रुखी और मृत त्वचा को निकाला जाता है, जिससे त्वचा युवा और स्वस्थ दिखाई देती है।
बोटोक्स अब भी सभी प्रक्रियाओं में सबसे लोकप्रिय बना हुआ है। विशेषज्ञों के मुताबिक वर्ष 2007 से अब तक इसके मामलों में 2,400 फीसदी से ज्यादा का इजाफा हुआ है।
सर गंगाराम अस्पताल के डॉ. राकेश खजांची ने बताया कि भारतीयों में तीखी नाक पाने का जुनून है, जो पश्चिमी लोगों की देखादेखी हो रहा है। इसके लिए राइनोप्लास्टी जैसी सर्जरी के मामलों में लगातार इजाफा हो रहा है। लोक नायक अस्पताल के डॉ. राजीव आहूजा ने कहा 'सर्जरी के बाद परफेक्ट लुक पाने संबंधी विज्ञापन महिलाओं और पुरूषों को कॉस्मेटिक सर्जरी के लिए प्रेरित कर रहे हैं।' उन्होंने कहा 'बहुत से ऐसे मामलों में परामर्श की भी जरूरत होती है। बहुत बार प्लास्टिक सर्जन को मनोवैज्ञानिक की भूमिका भी निभानी पड़ती है।'