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भ्रूण में तय होती हैं बीमारियाँ
सेहत समाचार
भ्रूण में हो सकती हैं बीमारियाँ
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क्या आपको लगता है कि आपका बचपन बेहद परेशानियों से भरा था? अगर ऐसा है तो हो सकता है कि जब आप माँ के पेट में रहे हों, उस समय आपकी उचित देखभाल न हुई हो। हो सकता है एक भ्रूण के रूप में आपको आपकी माँ वह सब नहीं दे पाई हो, जो वास्तव में दिया जाना चाहिए था, जिसकी वजह से अब मध्य उम्र में आकर मोटापा आपको परेशान कर रहा हो। यह किसी माँ विरोधी अभियान का लेख नहीं है, बल्कि विभिन्न शोधों के आधार पर ये तथ्य उभरकर सामने आए हैं। इन तथ्यों को एक पुस्तक 'लाइफ इन द वूम्ब' में संग्रहीत किया गया है।

फिजिशियन पीटर डब्ल्यू. नैथानिसिज की पुस्तक 'दि ओरिजिन ऑफ हेल्थ एंड डिजीज' और 'वूम्बी डियरेस्ट' में बताया गया है कि गर्भ में शिशु जिन स्थितियों में रहता है, अपने आने वाले जीवन में उसे उसी प्रकार की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जिनमें हृदय रोग, एलर्जी, कैंसर और मोटापे जैसी बीमारियाँ शामिल हैं।

यदि गर्भ के पहले महीनों के दौरान माँ पोषक आहार नहीं लेती, तो गर्भस्थ शिशुओं के वयस्क होने पर उन्हें मोटापे की बीमारी हो सकती है यानी भ्रूण को उचित पोषण न मिल पाने का खामियाजा बाद के जीवन में भुगतना पड़ता है।

कॉर्नेल विश्वविद्यालय में कॉलेज ऑफ वैटरनरी मेडिसिन के प्रोफेसर नैथानिसिज कहते हैं, 'जन्म से पूर्व ही हम विभिन्न जैविक सोपानों को पार कर चुके होते हैं। गर्भ में हमारे साथ जो भी घटित होता है, पूरी उम्र उसका प्रभाव रहता है। इससे कई किस्म की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना भी करना पड़ सकता है।'

दूसरे शब्दों में कहें तो जो हम खाते हैं, उससे कोई खास फर्क नहीं पड़ता। वास्तव में जो हमारी जैविक जननी खाती है, हमारा स्वास्थ्य उसी से निर्धारित होता है, लेकिन रुकिए, इससे अगर आप अपनी तमाम स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का ठीकरा माँ के सिर फोड़ते हैं, तो यह इस सच्चाई का सरलीकरण है, उसी तरह जैसे हमारे यहाँ गर्भावस्था का ही सरलीकरण कर दिया गया है।

आमतौर पर गर्भवती महिला और डॉक्टर दोनों यह मानकर चलते हैं कि गर्भावस्था एक महत्वपूर्ण स्थिति है, इसलिए इस दौरान आमतौर पर यही नीति अपनाई जाती है कि एक गर्भवती महिला को पर्याप्त पोषक आहार लेना चाहिए और अपनी पूरी सुरक्षा करनी चाहिए। इसके अलावा गर्भ में भ्रूण पर शराब, धूम्रपान अन्य मादक पदार्थों के दुष्प्रभावों के विषय में भी पर्याप्त शोध हो चुके हैं, लेकिन गर्भ में पलने वाले शिशु पर मां द्वारा ग्रहण किए गए भोजन के पड़ने वाले प्रभाव का यह पहलू एकदम नया है।
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