ये दवाइयाँ कुछ समय के लिए सिर्फ दर्द को दबाती हैं। कारण को ठीक नहीं करती। इन दवाइयों से पेट में अल्सर, एनिमिया, गुर्दे खराब होना इत्यादि परेशानियाँ आ सकती हैं।
कई लोग कमजोरी के लिए विभिन्न प्रकार के टॉनिक व विटामिन्स खाते रहते हैं। बी-कॉम्प्लेक्स व विटामिन-सी यदि ज्यादा ले भी लिए तो मूत्र के साथ निकल जाते हैं। लेकिन कुछ घुलनशील विटामिन्स जैसे विटामिन 'ए' व विटामिन 'डी' ज्यादा खुराक के कारण शरीर की प्राकृतिक प्रक्रिया में व्यवधान भी उत्पन्न कर सकते हैं।
एंटीबायोटिक्स अपने मन से न लें। कई बार उनकी जरूरत नहीं होती। कई मरीज इस हिस्ट्री के साथ आते हैं कि पिछली बार जैसे लक्षण थे, इसलिए हमने आपका पिछला पर्चा दिखाकर दवा ले ली, लेकिन इस बार फायदा नहीं हुआ।
एक ही एंटीबायोटिक को बार-बार लेने से उससे शरीर में रोग प्रतिरोधक शक्ति पैदा हो जाती है। ऐसी स्थिति में हल्की एंटीबायोटिक असर नहीं करती। अब केवल ताकतवर एंटीबायोटिक देने पर भी फायदा होता है। अधिक समय तक एंटीबायोटिक खाने से बीमारी बढ़ती रहती है और कई बार उसके साइड इफेक्ट्स- जैसे- दस्त होना, पेट खराब हो जाना, मुँह में छाले इत्यादि हो सकते हैं। इसलिए कोई सी भी एलोपैथिक दवाई चिकित्सक के परामर्श के बगैर न लें। खासकर वे लोग जो पहले ही से दवाइयाँ लेते रहते हैं उन्हें विशेष ख्याल रखना चाहिए क्योंकि उनकी पहले की दवाइयाँ इन नई दवाइयों से इंटरऐक्ट कर उनके लिए नई परेशानियाँ खड़ी कर सकती हैं।
डॉ., प्रोफेसर, पल्मोनरी मेडिसीन वरिष्ठ चिकित्सक हैं और मरीजों की कई कल्याणकारी योजनाओं से जुड़े हैं। देश-विदेश की कई कॉन्फ्रेंस में शोधपत्रों का वाचन कर चुके हैं। |