मुख्य पृष्ठ > विविध > सेहत > सेहत समाचार
सुझाव/प्रतिक्रियामित्र को भेजियेयह पेज प्रिंट करें
 
अंधत्व निवारण दिवस पर विशेष  Search similar articles
- स्वर्ण शेखर सिन्हा

अंधत्व एक ऐसी मानवीय विडम्बना है जिसमें मनुष्य अपने आसपास की सजीव एवं निर्जीव, स्थिर एवं चलायमान किसी भी वस्तु को नहीं देख पाता है। अपने आसपास क्या मनोवैज्ञानिक रूप से घटित हो रहा है उसे समझ नहीं पाता है।

हालाँकि हमारे देखने का नजरिया विभिन्नताओं से भरा है अगर हम इसे मानवीय परिपूर्णताओं में एक दोष के रूप में लें तो यह एक परिपूर्ण अंग में अंग दोष के रूप में नजर आएगा पर इसे दूसरे पक्ष से देखें जहाँ सामाजिक विचारों का संगम होता है तो हमें यह महसूस होगा कि यह कलयुग में अंधत्व का अस्तित्व होना बहुत जरूरी है वरना यहाँ तो लोग आँखें होते हुए भी अंधे हैं क्योंकि हम देखते नहीं कि घर में क्या हो रहा है, पड़ोस में क्या हो रहा है, मोहल्ले में क्या हो रहा है, शहर में क्या हो रहा है, देश में क्या हो रहा है, विश्व में क्या हो रहा है और सबसे प्रमुख अपने अंदर के व्यक्तित्व में पल-पल क्या परिवर्तन हो रहा है।

मीडिया जगत का मैं आभारी हूँ जो देश की मूलभूत आवश्यकताओं को दरकिनार करते हुए देश की जनता के सोच के अनुसार हिंसाग्रस्त समाचार को प्रसारित कर हमें सिर्फ सीमित सोच तक सिमटाकर रखना चाह रही है। यह सीमित सोच भी अंधत्व के समान है।

मीडिया की यह खबरें प्रसारित करना कोई खराब बात नहीं है। पर जनता को अध में न छोड़ते हुए उन्हें इनका निराकरण भी प्रस्तुत करना चाहिए। अगर सिर्फ और सिर्फ इसकी बातें करूँ तो यह ठीक नहीं है क्योंकि इसी युग में आपके पास लोगों की दुर्भावना का सामना करने के लिए आँखें होना जरूरी है।

आज देश की आबादी का कुछ प्रतिशत या तो जन्म के साथ अंधत्व से ग्रस्त है या जन्म के बाद हुई दुर्घटनाओं के चलते इसका शिकार हुआ। इसमें से कुछ के उपचार संभव हैं। कुछ संभव कर सकते हैं। आज अंधत्व निवारण दिवस है आप यदि दूसरे के अंधकारमय जीवन को रोशनी देने का यदि माद्‍दा रखते हैं तो आँखें दान करने के बारे में सोचें।
और भी
गंजेपन का इलाज संभव
बाबा रामदेव चीन में खोलेंगे रिसर्च सेंटर
कैंसर फैलाने वाले जीन सिग्नेचर की खोज
नमक ज्यादा खाने से खतरा नहीं
स्तन कैंसर महिलाओं का दुश्मन
दिल की चमत्कारिक गोली 'पोली पिल'