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गंजेपन का इलाज संभव  Search similar articles
जो लोग गंजेपन से परेशान हैं उनके लिए एक अच्छी खबर है। आरंभिक जाँच में यह बात सामने आई है कि प्रयोगशालाओं में विकसित बालों की कोशिकाओं के जरिए गंजेपन का इलाज संभव है। इस तकनीक में आदमी के सिर के बचे बालों की कुछ कोशिकाओं को लेकर उसे प्रयोगशाला में कई गुणा बढ़ाया जाता है और फिर उसे सिर के उन हिस्सों में प्रतिरोपित किया जाता है जहाँ बाल झड़ चुके होते हैं।

ब्रिटेन के शोधार्थियों का कहना है कि छः महीने के इस इलाज के बाद 19 में से 11 लोगों के सिर में नए बाल उग आए। हालाँकि ब्रिटेन के एक विशेषज्ञ का कहना है कि इस प्रयोग में अभी और काम बाकी है जिससे नए बाल अच्छे नजर आएँ। आदमी में गंजापन अर्थात बालों का झड़ना (एंड्रोजेनेटिक एलोपेसिया) एक आनुवांशिक बीमारी है। पचास वर्ष की आयु के बाद करीब चालीस प्रतिशत लोग दुनिया में गंजेपन से पी़डि़त हैं।

बालों के प्रत्यारोपण की अभी जो विधि अपनाई जाती है उसमें सिर के बचे हुए बालों के बजड़े गुच्छों को एनेस्थीजिया यानी चेतनाशून्य करने वाली दवा की सहायता से मनचाहे हिस्सों में प्रतिरोपित कर दिया जाता है। इस विधि की पूरी सफलता सिर के बचे हुए बालों पर निर्भर करती है। इसमें कोई नए बाल नहीं उगाए जा सकते हैं।

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इस नई विधि को तैयार करने वाली ब्रिटेन की कंपनी इंटरसाइटेक्स का कहना है कि इसके सहारे प्रतिरोपण के लिए बालों की असंख्य कोशिकाएँ उपलब्ध कराई जा सकती हैं। कंपनी का कहना है कि यदि अन्य जाँच भी सफल रहे तो पाँच वर्षों में इस तकनीक को बाजार में लाया जा सकता है।

कंपनी के वैज्ञानिक डॉक्टर पॉल केंप ने कहा, 'मुझे लगता है कि इससे बालों की देखभाल में क्रांतिकारी परिवर्तन आ जाएगा। जैसे ही लोगों को पता लगेगा कि वे गंजे हो रहे हैं, वे इस विधि को अपना सकते हैं। इस विधि से फायदा होना निश्चित है।' (-एजेंसी)
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