कोलेस्ट्रॉल बढ़ने के कारण धमनियों में रक्त के थक्के जम जाने की वजह से रक्त प्रवाह में रुकावट पैदा हो जाती है। जिससे सर्वप्रथम धमनियों व उसके आसपास के हिस्से में सूजन व दर्द, किसी-किसी को चमड़ी पर काले धब्बे और घाव तक हो जाते हैं।
यदि इनका समय पर निदान-उपचार नहीं किया गया तो आगे जाकर लकवे की नौबत आ जाती है और कहीं-कहीं पर तो उस अंग को काट देना पड़ता है। लकवा होने के साधारणतया दो कारण होते हैं। पहला धमनी में खून की रुकावट और दूसरा धमनी के फट जाने के कारण मस्तिष्क में खून का जम जाना। चूँकि रुकावट का पता हलकी सूजन, दर्द, शरीर में थकान का महसूस होना, चमड़ी पर धब्बे आना इत्यादि से होने लगता है अतः यदि इसी अवस्था में वास्कुलर सर्जन (धमनियों व नसों के शल्य चिकित्सक) की सलाह ले ली जाए तो आगे जाकर बायपास या इंडोवास्कुलर सर्जरी की आवश्यकता ही नहीं पड़ती।
जिस प्रकार हृदय रोग के मरीजों की बायपास या एंजियोप्लास्टिक सर्जरी होती है, उसी प्रकार शरीर के अन्य भागों में भी बायपास सर्जरी का आविष्कार हो चुका है। जिसे वास्कुलर व इंडोवास्कुलर सर्जरी के नाम से जाना जाता है।
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