आस्टिन के टेक्सास विश्वविद्यालय ने एक ऐसा सॉफ्टवेयर तैयार किया है जो किसी के लार (सेलाइवा) का नमूना दिल के दौरे का पूर्वानुमान लगाने के लिए काफी होगा। नई 'नैनो बॉयो चिप' तकनीक की मदद से यह संभव हो सकेगा। यह चिप बैंक क्रेडिट कार्ड जितनी बड़ी होगी और 15 मिनट में परिणाम बता देगी।
इसे दिल के दौरों से पीड़ित लोग जिनमें अधिकांश महिलाएँ होती हैं, की शिकायत रहती है कि उन्हें दिल के दौरों से संबंधित कोई लक्षण पहले से पता ही नहीं चल पाता। इस बारे में खोज के सूत्रधार रहे वैज्ञानिक जॉन टी. मैकडेविट कहते हैं कि एक बार किसी को दिल का दौरा पड़ जाता है तो उसके कार्डिएक टिश्यू की स्थाई क्षति हो जाती है। ज्यादातर लोगों को ऐसे मौके पर मेडिकल सहायता भी देर से मिल पाती है। नई खोज इन चीजों को काफी हद तक कम कर देगी।
मैकडेविट दावा करते हैं कि इस खोज से कइयों को राहत मिलेगी, क्योंकि दिल के दौरे की संभावना को काफी पहले ही पहचान लिया जाएगा। इस चिप को बनाने के दौरान केंटकी विवि ने 56 ऐसे लोगों की लार का परीक्षण किया, जिन्हें दिल का दौरा पड़ चुका था और 59 उन लोगों की लार का परीक्षण भी किया गया जो दिल के मामले में बिलकुल ठीक थे।
वैज्ञानिकों ने इन नमूनों से 32 प्रोटीनों की पहचान की जो दिल के दौरे के लिए मुख्य कारक थे। वैज्ञानिकों ने परीक्षण के दौरान पाया कि जिन लोगों की लार के नमूनों में प्रोटीन की मात्रा अधिक होती है उनमें दिल का दौरा पड़ने की संभावना अधिक होती है। केंटकी टीम के वैज्ञानिक डॉ. क्रैग एस. मिलर के अनुसार इस खोज से हम यह आसानी से पता लगा सकेंगे कि दिल का दौरा पड़ने की संभावना किस व्यक्ति में कितनी अधिक है।
मैकडेविट के साथ इस खोज में अन्य विश्वविद्यालयों के वैज्ञानिकों ने भी सहयोग किया है जिनमें लाउसविले विवि, सेन टियागो स्थित टेक्सास विवि के हैल्थ साइंस सेंटर आदि शामिल हैं। (एजेंसी)
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