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जलवायु परिवर्तन से 28 नई बीमारियाँ आईं
विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य दिवस पर रोकथाम का लिया संकल्‍प
जलवायु परिवर्तन के अंतरराष्‍ट्रीय पैनल के मुताबिक विश्‍व के औसत तापमान में एक डिग्री सेल्‍शियस की वृद्धि हुई है। पैनल का मानना है कि ग्रीन हाउस गैसों के उत्‍सर्जन में रुकावट नहीं आने के कारण जलवायु में कई परिवर्तन आए हैं, जो कि स्‍वास्‍थ्‍य पर बुरा प्रभाव डाल रहे हैं।

इस बात की आशंका जताई जा रही है कि आने वाले 90 वर्षों में तापमान में 1.8 से 4 डिग्री सेल्‍शियस तक की वृद्धि हो जाएगी। ग्‍लोबल वार्मिंग और बेमौसम होने वाली बारीश के कारण बीमारियों में इफाजा हुआ है। साथ ही कुपोषण के मामले भी बढ़े हैं।

जलवायु परिवर्तन के कारण सर्दी और गरमी के मौसम में मरने वालों की संख्‍या बढ़ी है। पिछले कुछ वर्षों में भारत में बदलते मौसम के दौरान हजारों लोगों ने अपनी जान गवांई है। भारत में लू लगने से हाइपोथेमिया (हीट वेव) और हृदय और सांस से संबंधित रोगी बढ़ रहे हैं।

भारत, बांग्‍लादेश और मलेशिया में जलवायु परिवर्तन के कारण हर साल डेंगू, मलेरिया, डायरिया, चिकनगुनिया और जापानी इंसेफ्लाइटिस के कारण काफी तादात में मौत होती है। वहीं वायरल हेपेटाइटिस के मरीजों की संख्‍या में तेजी आई है। पिछले इस साल में इस बीमारी पर किसी प्रकार का अंकुश नहीं लग पाया है। जहाँ 1996 में वायरल हेपेटाइटिस के 131808 मामले सामने आए, वहीं 2004 में यह बढ़कर 203939 हो गया। हालाँकि इसके अगले वर्ष इसमें थोड़ी कमी आई। इधर कालरा के रोगी भी हर साल भारी संख्‍या में अस्‍पलात में भरती होते हैं। 1997 में जहाँ 3173 मरीज थे, वो 2004 में 4728 होगए।

बदलते मौसम के कारण बीमारियों के प्रति मनुष्‍य का शरीर संतुलन नहीं बना पा रहा है, जिससे हर साल मौतों का आँकड़ा बढ़ता जा रहा है। भारत में बदलते मौसम की मार अन्‍य देशों की अपेक्षा ज्‍यादा है। वैसे ऐसा नहीं है कि मौसम की मार केवल भारत पर पड़ रही हो।

बीमारी ........विश्‍व में न्‍यूनतम दर ........ भारत में दर ........ विश्‍व में अधिकतम द

डायरिया ..................... 0.2 ..................................14 ......................... 114
सांस की बीमारी ............0.1 ................................10 ......................... 56
मलेरिया ..................... 0.0 ..................................1.7 .........................4.2
अन्‍य वाइरल बीमारी .... 0.0 ................................1.7 ......................... 4.2
सीओपीडी ................... 0.0 ................................2.7 ........................ 4.7
दमा .......................... 0.3 ................................1.3 ..........................2.4

जलवायु परिवर्तन का सबसे बड़ा असर मलेरिया पर हुआ है। पिछले 8 साल में इसके प्रभाव क्षेत्र में 10 फीसदी और इलाकों आए हैं। वहीं आशंका जताई जा रही है कि 2080 तक पूरा भारत मलेरिया के चपेट में होगा।

संयुक्‍त राष्‍ट्रसंघ (यूएन) ने इस बात को भी ध्‍यान में रखा है कि जलवायु में परिवर्तन के कारण बाढ़, सूखा और तूफान के कारण और इसके फलस्‍वरूप कई महामारियाँ फैलती हैं। इन सभी प्रकार की बीमारियों के प्रति जागरुकता और जलवायु परिवर्तन के असामान्‍य प्रभावों से जन सामान्‍य की सुरक्षा हो सके।
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