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मोटापे से हो सकता है कैंसर
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विश्‍व कैंसरिसर्कोकैंसे 6 कारणोमेमोटापकारमानहैप्रदूषण के साथ ही मोटापे की महामारी में तेजी से वृद्धि हुई है। विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन (डब्‍ल्‍यूएचओ) के मुताबिक सन 2020 में कैंसर के मरीजों में 50 फीसदी की वृद्धि हो जाएगी। कई शोधों से पता चला है कि मोटापा, कैंसर और विषैले केमिकल्स में आपसी संबंध है।

पहले जहाँ विषैले केमिकल्स के कारण कार्सिनोजेन की मात्रा का बढ़ना बताया गया था, वहीं नए शोध में यह जाहिर हुआ है कि ये केमिकल्स शरीर में वसा (फैट) में अपने लिए महफूज जगह बनाते हैं। इससे कैंसर होने के खतरे में दो गुना इजाफा होने की आशंका जताई जा रही है।

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मोटापे के कारण हृदय रोग होने का खतरा पहले से ही मौजूद था। शरीर में नुकसान पहुँचाने वाले केमिकल्स से लड़ने की स्‍वाभाविक प्रवृत्ति होती है, लेकिन यह क्षमता एक सीमा तक ही मौजूद है। रोजमर्रा की जिंदगी में हम तमाम तरह के केमिकल्स (जेनोस्‍ट्रोजेन), जैसे आग बुझाने की गैस, कीटनाशक, प्‍लॉस्‍टिक आदि से दो-चार होते हैं।
  विश्‍व कैंसर रिसर्च कोश ने कैंसर के 6 कारणों में से मोटापे को भी एक कारण माना है। प्रदूषण के साथ ही मोटापे की महामारी में तेजी से वृद्धि हुई है। विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन के मुताबिक सन 2020 में कैंसर के मरीजों में 50 फीसदी की वृद्धि हो जाएगी।      


हम रोज ही प्‍लास्‍टिक की बोतल या टंकी में रखा पानी पी रहे हैं, जिससे दर्जनों केमिकल्स हमारे शरीर में जा रहे हैं। इनके कारण प्रोस्टेट कैंसर होने की आशंका बढ़ जाती है। एक अनुमान के मुताबिक 75 वर्ष से अधिक उम्र के पुरुषों की मौत के पीछे प्रोस्टेट का कैंसर बड़ा कारक है। इसमें मोटापा उनकी मौत के कारण को बढ़ा देता है। दुबले पुरुष के मुकाबले मोटे लोगों में प्रोस्टेट कैंसर के मामले ज्‍यादा देखे गए हैं।

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अमेरिका में एक सर्वेक्षण में पाया गया कि सौंदर्य प्रसाधनों में भी कई जेनोस्‍ट्रोजेन यौगिक पाए जाते हैं। इनमें अमूमन कुछ बहुत मात्रा में कीटनाशक और जड़ी-बूटीनाशक तत्‍व होते हैं। यहाँ पाया गया कि इन सौंदर्य प्रसाधनों में करीब 10000 केमिकल्स थे।

कई अध्‍ययनों में ब्रेस्‍ट ट्यूमर के लिए विषैले केमिकल्स के उपयोग को बड़ा जिम्‍मेदार पाया गया है। अध्‍ययन में पाया गया है कि मोटे लोगों की वसा में ये विषैले केमिकल्स अपनी जगह बना लेते हैं, जिससे कैंसर होने की आशंका बढ़ जाती है।
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