अगर आप तेज खर्राटे भरते हैं तो अब जरा सावधान हो जाएँ। हंगरी में हुए एक अध्ययन से पता चला है कि खर्राटों और दिल की बीमारियों में गहरा संबंध है। हंगरी के वैज्ञानिकों ने 12 हजार से अधिक रोगियों का साक्षात्कार लेने के बाद यह निष्कर्ष निकाला है कि सामान्य लोगों की तुलना में जोरदार खर्राटे लेने वालों को दिल का दौरा पड़ने की आशंका अधिक होती है।
यह निष्कर्ष 'जर्नल स्लीप' में प्रकाशित हुए हैं। इस अध्ययन के बाद पहले से मौजूद उन सिद्घांतों को मजबूती मिली है, जिनमें कहा जाता रहा है कि खर्राटों और हृदय रोगों में संबंध होता है।
खर्राटों से खतरा हम जानते हैं कि हर व्यक्ति अपने जीवन की किसी न किसी अवस्था में खर्राटे अवश्य लेता है। यह समस्या सामान्यतः मोटे लोगों में अधिक पाई जाती है। अनुमान है कि 40 फीसदी पुरुष और 24 फीसदी महिलाएँ खर्राटे भरने की आदी होती हैं। कई वर्षों से वैज्ञानिक मानते आए हैं कि खर्राटों और दिल की बीमारियों में गहरा संबंध होता है। हंगरी में हुए इस नए अध्ययन के बाद अब इस धारणा को और बल मिला है। | | अगर आप तेज खर्राटे भरते हैं तो अब जरा सावधान हो जाएँ। हंगरी में हुए एक अध्ययन से पता चला है कि खर्राटों और दिल की बीमारियों में गहरा संबंध है। हंगरी के वैज्ञानिकों ने 12 हजार से अधिक रोगियों का साक्षात्कार लेने के बाद यह निष्कर्ष निकाला है। |
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नया अध्ययन अपने अध्ययन में वैज्ञानिकों ने 12 हजार से अधिक लोगों से उनके घर पर साक्षात्कार किया और उनसे प्रश्नावलियाँ भरवाईं। आम लोगों से तुलना करने पता चला कि तेज खर्राटे भरने वाले लोगों में हार्टअटैक का खतरा 34 फीसदी अधिक होता है।
इन लोगों में दिल के दौरेका खतरा सामान्य लोगों की तुलना में 67 फीसदी बढ़ जाता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि साँस लेने में आने वाले ठहराव और तेज खर्राटों का इस्तेमाल ऐसे लोगों की पहचान में किया जा सकता है, जिनमें इन रोगों की संभावना है।
शोध के आँकड़े बताते हैं कि जो लोग धीरे-धीरे खर्राटे लेते हैं, उनमें हृदय रोगों के खतरे में कोई वृद्धि नहीं होती। पुरुषों के लिए खुशखबरी यह है कि 70 साल की आयु के बाद उनमें खर्राटे लेने की प्रवृत्ति घट जाती है।
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