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'क्रोनिक पेन' से मस्तिष्क पर प्रभाव
KaptanND
अमेरिका में हुए एक अध्ययन के अनुसार हर समय होने वाला तेज दर्द मानसिक संतुलन को बिगाड़ सकता है और दूसरी कई बीमारियों का कारण बन सकता है।

गौरतलब है कि 'क्रोनिक पेन' यानी घातक पीड़ा के शिकार मरीज हफ्ते के सातों दिन और दिन के 24 घंटे दर्द का अनुभव करते हैं। इसके चलते कई तरह की बीमारियाँ हो सकती हैं, जैसे नींद न आना, तनाव और छोटे-छोटे निर्णय लेने में कठिनाई।

हेल्थ पोर्टल 'हेल्थ डे' के अनुसार अनुसंधानकर्ताओं के अनुसार लगातार दर्द का अनुभव करने के कारण मस्तिष्क का एक हिस्सा लगातार क्रियाशील रहता है। यह प्रक्रिया स्नायु तंत्र को नुकसान पहुँचाती है।
  'क्रोनिक पेन' यानी घातक पीड़ा के शिकार मरीज हफ्ते के सातों दिन और दिन के 24 घंटे दर्द का अनुभव करते हैं। इसके चलते कई तरह की बीमारियाँ हो सकती हैं, जैसे नींद न आना, तनाव और छोटे-छोटे निर्णय लेने में कठिनाई।      


शिकागो 'फिनबर्ग स्कूल ऑफ मेडिसिन' के अनुसंधानकर्ता शियाल्वो के अनुसार 'क्रोनिक पेन' के शिकार लोगों में भावनाओं से जुड़ा मस्तिष्क का हिस्सा कभी शांत नहीं रहता, जिसके कारण वह स्थायी रूप से निष्क्रिय हो जाता है। शियाल्वो के अनुसार इस बात को साबित करता है कि इस तरह की पीड़ा के जल्द इलाज के अलावा यह भी जरूरी है कि मस्तिष्क में होने वाली इस प्रक्रिया को नियंत्रित करने के तरीके खोजे जाएँ। (न्यूज डेस्क)
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