आजकल महिलाओं का नौकरी करना कोई नई बात नहीं है। यह शौक के बजाय जरूरत बन हो गई है कि महिलाएँ घर की चौखट से बाहर निकल कर अपने अस्तित्व को भी पहचानें और परिवार का आर्थिक संबल भी बनें। लेकिन इस दबाव के चलते न सिर्फ उसकी जिम्मेदारियाँ दोहरी हुई है बल्कि उसकी सेहत पर भी बुरा असर पड़ा है। कामकाजी महिलाएँ आमतौर पर तनाव, अवसाद, कमर दर्द, सिरदर्द, टाँगों में खिंचाव एवं सर्वाइकल स्पॉंडिलाइटिस जैसी बीमारियों का शिकार हो रहीं हैं। क्या करें जब दर्द सताएँ पैरों का दर्द किचन में ज्यादा देर तक खड़े रहने के बाद ऑफिस में पैर लटका कर बैठना पड़ता है। फलस्वरूप पैरों मे सूजन, घुटनों में दर्द और टाँगों में खिंचाव आने लगता है। ऐसे में प्रयास करें कि बैठते समय दोनों पैरों पर बराबर बोझ डालें। बीच-बीच में जूते उतार कर पैरों को आराम दें। लगातार एक जैसी बैठी रहने से भी यह समस्या बड़ी हो जाती है। अत: थोड़ी-थोड़ी देर बाद टहलना लाभदायक होगा। घर आकर पैरों को नमक मिले गुनगुने पानी में डाल कर बैठें। इस सिंकाई से पैरों को आराम मिलेगा। कमर दर्द सही स्थिति में न बैठने से और झटके से बार-बार उठने से कमर दर्द की शिकायत होती है। इससे बचने के लिए एक आसान सा उपाय आजमा सकतीं हैं। अपने दोनों हाथ कमर पर रख कर दाएँ-बाएँ देखें। यह एक ऐसा व्यायाम है जो आसपास के साथी कर्मचारियों को पता भी नहीं लगने देगा कि आपने व्यायाम किया है और आपको कमर दर्द में आराम भी मिलेगा। जब भी कुर्सी से उठें आराम से उठें, झटके से उठने से बचें। अनमोल आँखें अधिक झुक कर काम करने से और लगातार कंप्यूटर की स्क्रीन देखने से आँखों पर प्रभाव पड़ता है। इससे सिर दर्द की समस्या भी उभर आती है। लिखने पढ़ने का काम करते समय ध्यान रखें कि रोशनी का सही प्रबंध हो। आँखों की परेशानी से बचने के लिए काम करते समय बीच में कुछ समय के लिए आँखें बँद कर आराम कर लें। गर्दन को तीन बार तीनों तरफ घुमाकर आसान सा व्यायाम करें। ध्यान रखें गर्दन आगे की ओर ना झुकाएँ। मात्र थोड़ी सी देर सुस्ताने से आप काम के लिए नई ऊर्जा ग्रहण कर सकतीं हैं। सुहानी नींद कोशिश करें कि रात को पूरी और प्यारी नींद मिलें। कई बीमारियों की जनक अनिद्रा ही है। रात को नींद पूरी ना हुई तो दूसरे दिन ऑफिस का काम आप स्फुर्ति और कुशलता से नहीं कर पाएँगी। तनावसबसे पहले तो खुद को यह समझाएँ कि कामकाजी जीवन में तनाव आना स्वाभाविक है। हमारा बस परिस्थिति पर नहीं होता लेकिन परिस्थिति से निपटना हमारे ही बस में होता है। हम परिस्थिति को बदल नहीं सकते अत: स्वयं को ही सक्षम बनाना होगा कि हर हालात से हँसते-हँसते निपट सकें। और एक अनिवार्य बात, जब ऑफिस से निकलें तो वहाँ के तनाव उसी दरवाजे पर छोड़ दें और जब घर से निकलें तो घर की उलझनों को वहीं दहलीज पर रख दें। ऐसा मुश्किल जरूर है मगर असंभव नहीं। अपनी दोनों जिन्दगियों को एक-दूजे में मिला कर किसी नई मुसीबत को आमंत्रित ना करें। |