1. प्रात: काल शीघ्र उठें और नींबू पानी अथवा तांबे के बर्तन में रखा बासी पानी पर्याप्त मात्रा में पिएँ। 2. प्रात:काल और सायंकाल हल्का व्यायाम करें। सामान्य रूप से टहलना भी लाभदायक होता है। 3. नाश्ते और भोजन में मधुर रसदार और पौष्टिक आहार लेना चाहिए। 4. सड़े-गले, बासी, जले-भुने और सस्ते खाने से बचना चाहिए। 5. स्नान और प्रार्थना भी नित्य नियम से करनी चाहिए। 6. शरीर की शुद्धि के लिए स्नान जितना आवश्यक है उतनी ही प्रार्थना भी जरूरी है। 7. ये दोनों क्रियाएँ औपचारिकता की तरह नहीं होनी चाहिए। जो भी करें पूरे मन से करें। 8. नींद और विश्राम में कटौती ना करें। यह टॉनिक की तरह शरीर तथा मन को ताजगी प्रदान करता है। 9. परिश्रम से जी ना चुराए। जितना संभव हो शारीरिक और मानसिक श्रम करें तथा पूरी तन्मयता और प्रसन्नतापूर्वक करें। 10. सप्ताह में एक दिन हर कार्यालय में अवकाश रहता है ठीक इसी प्रकार पेट को भी विश्राम देना चाहिए। 11. व्रत के नाम पर शरीर को मारना नहीं चाहिए बल्कि नींबू पानी, छाछ, या फलों का रस पीकर पेट को तनिक आराम देना चाहिए। 12. दिन भर में एक ऐसा समय निकालना चाहिए जब आप एकांत में आत्मनिरीक्षण कर सकें। इससे आपको अच्छा नागरिक बनने में मदद मिलेगी। 13. आत्मविश्वास, ईश्वर विश्वास और सदैव सक्रियता तथा जागृति आपके सुखी व स्वस्थ जीवन के लिए संजीवनी का कार्य करती है। 14. सेक्स में संतुलन रखे। सेक्स जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। संतुलित सहवास स्त्री-पुरुष दोनों के लिए फायदेमंद है। |