* पढ़ते-पढ़ते आप ऊब गए हैं तो खड़े हो जाइए और 5-10 मिनट टहलें या किसी मित्र से फोन पर चलते-चलते बात करें या टी.वी. ऑन कर कोई मधुर संगीत सुनें।* नकारात्मक न सोचें क्योंकि इससे तनाव बढ़ता है आप हमेशा डिप्रेशन में रहते हैं। नकारात्मक सोच वाले लोग सकारात्मक सोचने वालों कीतुलना में कम जीते हैं।* नकारात्मक सोचने वाले लोग अन्य लोगों की तुलना में अधिक भोजन करते हैं। परिणामस्वरूप आगे चलकर उनके बीमार होने की आशंका बढ़ जाती है।* नकारात्मक विचार मन में न आएँ, इसके लिए सकारात्मक कार्यों में लग जाएँ।* आप चाहें तो प्रकृति के नजदीक जाकर ईश्वर की खूबसूरत संरचना को निहारें, पेड़-पौधे देखें या पक्षियों की आवाज सुनें। मन को सुकून मिलेगा।*जब भी मन में नकारात्मक विचार आए तो टी.वी. पर कोई मनोरंजक प्रोग्राम देखने लगें। ऐसे में कोई अच्छी किताब पढ़ें या रसोई में जाकर मनपसंद व्यंजन बनाएँ। यदि आप किसी अन्य कार्य में व्यस्त हो जाते हैं तो दस मिनट में ही नकारात्मक विकार स्वतः ही गायब हो जाते हैं।* नकारात्मक विचार वाले लोगों से बात न करें क्योंकि ऐसे लोग और कुछ करें या न करें लेकिन आपको परेशान अवश्य ही कर देंगे।*सकारात्मक और अशावादी विचार रखने वाले व्यक्ति चुस्त-दुरुस्त रहते हैं तथा उनमें निराशा नहीं पसरती है। वे अधिक उम्र तक सदाबहार यौवन के स्वामी बने रहते हैं।* स्वस्थ रहने के लिए साइकिल चलाएँ। महिलाओं के लिए चक्की और पुरुषों के लिए साइकिल चलाना श्रेष्ठ व्यायाम है। घर से कार्यालय, बाजार, बच्चों के स्कूल या बिजली के बिल आदि जमा करने के लिए जाते समय साइकिल का प्रयोग करें। * साइकिलिंग शरीर को पूरा व्यायाम देकर बीमारियों से बचाती है और शरीर को चुस्त-दुरुस्त बनाएँ रखती है।* साइकिलिंग हृदय रोगों से भी व्यक्ति को बचाती है।* साइकिलिंग पैरों की मांसपेशियों को निरोग रखती है और शरीर से पसीना निकालकर स्वास्थ्य में सकारात्मक सोच में वृद्धि भी करती है। * सबसे महत्वपूर्ण अपने परिवार के साथ क्वालिटी टाइम बिताएँ। |