याद रखें 102 डिग्री फेरनहाइट से अधिक बुखार हो तो हथेलियाँ, पगतलियों, सिर और पेट पर पानी की पट्टियाँ तब तक अदल-बदल कर रखते रहें जब तक कि तापमान 100 डिग्री फेरनहाइट तक नहीं आ जाए। याद रखिए, बुखार इस बात की स्पष्ट सूचना है कि सक्षम और योग्य चिकित्सक की सलाह लेकर शरीर को भारी हानि और अनहोनी से रक्षा की जाए।
अहम बात यह है कि मनुष्य उष्ण रक्त प्राणी है और मस्तिष्क में स्थित ताप नियंत्रक केंद्र शरीर के तापमान को 37 डिग्री सेल्सियस पर बनाए रखने की पूरी कोशिश सतत करते रहते हैं। शरीर की समस्त क्रियाएँ इसी तापमान पर अपनी संपूर्ण क्षमता के साथ संपन्न होती हैं। अत: तेज बुखार की स्थिति में बताई गई विधि से ठंडे पानी की पट्टियाँ तुरंत रखना शुरू कर देना चाहिए। अन्यथा मस्तिष्क के अवयवों में स्थायी या अस्थायी विकृति आ सकती है, जो घातक सिद्ध हो सकती है।
बच्चों को अक्सर झटके आने लगते हैं, जिसकी वजह से कम से कम 3 से 5 वर्ष तक मिर्गी की दवा बिना चूके लगातार देना आवश्यक होती है। बुखार के दौरान दो बातों को ध्यान में रखना आवश्यक है, एक तो ऊर्जा का क्षय या व्यय कम से कम होना चाहिए, चलते-फिरते, काम करने, पढ़ने, टीवी देखने, बोलने, स्नान करने आदि में ऊर्जा का क्षय होता है, जिससे ज्यादा थकान और कमजोरी आती है। बीमारी से लड़ रहे शरीर को जबकि अतिरिक्त ऊर्जा की आवश्यकता होती है।
दूसरा यह है कि भोजन बंद न करें, हाँ तरल पदार्थ अधिक से अधिक मात्रा में अधिक बार लें। गरिष्ठ भोजन को पचाने में शरीर को अतिरिक्त ऊर्जा की आवश्यकता होती है, अत: घी, तेल, मावेदार पदार्थ न लें। मधुमेह न हो तो एक गिलास उबले पानी में दो-तीन चम्मच शकर या ग्लूकोज, चुटकी भर नमक और 10-15 बूँद नीबू का रस डालकर बार-बार लें। फलों का रस, फल, छाछ, दूध, दलिया, मूँग की दाल का पानी आदि लेना चाहिए।
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