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बच्चों में बढ़ती लर्निंग डिसएबिलिटी
- डॉ. मिकीन जैन

ND
बढ़ते हुए बच्चों की समस्याओं को पालकों के लिए समझना आसान नहीं होता। अक्सर जब भी बच्चा सीखने में सामान्य से अधिक देर लगा रहा हो तो उसे संभव है कि उसे लर्निंग डिसएबिलिटी की समस्या हो। पालक बच्चे के क्लास में फेल होने पर भी उसे चिकित्सक के पास ले जाना उचित नहीं समझते।

लर्निंग डिसएबिलिटी यानी सीखने की अक्षमता अभी चिकित्सा विज्ञान के लिए भी अभी तुलनात्मक रूप से नई खोज है। आमतौर पर ऐसे लोगों को पढ़ने, लिखने, स्पेलिंग बनाने अथवा गणित में समस्याएँ होती हैं। इस स्थिति में पालक अपने बच्चों के लिए ये शिकायतें करते हैं।

* मेरी 10 वर्षीय पुत्री प्रिया को पढ़ना बिल्कुल नापसंद है। वह बहुत धीरे-धीरे पढ़ती है तथा शब्दों का स्पष्ट उच्चारण नहीं कर पाती है।

* मेरे बेटे की लिखने की स्पीड बहुत कम है। उसकी टीचर हमेशा स्पेलिंग मिस्टेक की शिकायत करती है।

* मेरा बेटा पढ़ने में तो बहुत तेज है। उसे याद भी जल्दी होता है पर वह लिख नहीं पाता। पेपर पूरा नहीं लिख पाता। हालाँकि उसको आता सब कुछ है। पूछने पर तो वह सब कुछ सही बताता है, पर लिखने में कमजोर है।
  लर्निंग डिसएबिलिटी यानी सीखने की अक्षमता अभी चिकित्सा विज्ञान के लिए भी अभी तुलनात्मक रूप से नई खोज है। आमतौर पर ऐसे लोगों को पढ़ने, लिखने, स्पेलिंग बनाने अथवा गणित में समस्याएँ होती हैं। इस स्थिति में पालक अपने बच्चों के लिए ये शिकायतें करते हैं।      


महत्वपूर्ण तथ्
* यह सभी उम्र तथा वर्ग में हो सकता है।

* यह सभी समाज तथा आर्थिक स्थिति में हो सकता है।

* यह मानसिकता अक्षमता नहीं है। वस्तुतः ऐसे बच्चों के बौद्धिक सूचकांक अधिक होता है।

* इसके साथ व्यवहार संबंधित समस्याएँ जैसे कि अति चंचलता आदि समस्याएँ हो सकती है।

* यह प्राथमिक रूप से व्यक्तित्व के भावनात्मक, मानसिक तथा व्यावहारिक विकास के समय होने वाले विचलन की वजह से होता है, जो बच्चे को घर तथा स्कूल में समायोजित नहीं होने देते हैं।
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