स्वस्थ शरीर की आधारशिला संतुलित और उचित आहार पर टिकी रहती है। जैसे ही यह संतुलन गड़बड़ाता है, स्वास्थ खराब हो जाता है। इन दिनों लोग आधुनिक जीवनशैली के तनाव से जूझ रहे हैं। उनका खानपान बिगड़ गया है, उन्हें न तो समय पर खाने का ध्यान रहता है और न भक्ष्य-अभ्यक्ष का विवेक रहता है। यही वजह है कि युवा पीढ़ी तेजी से पेट रोगों का शिकार हो रही है।
पाश्चात्य संस्कृति के अंधानुकरण व अपने कार्यक्षेत्र में सबसे आगे बढ़ने की चाह में स्वास्थ्य के प्रति ध्यान लगभग खत्म-सा हो गया है। इसका परिणाम यह हो रहा है कि जिस उम्र में पूर्णतः स्वस्थ रहना चाहिए, लोग बीमार रहने लगे हैं।
स्वस्थ काया के लिए वैज्ञानिक रूप से सोच-विचार करके आहार करना अतिआवश्यक है। अच्छे स्वास्थ्य के लिए शरीर को उम्र, लिंग, वजन एवं शारीरिक कार्यक्षमता के अनुसार सभी पौष्टिक तत्वों की जरूरत होती है।
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