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नई पीढ़ी एचआईवी के प्रति जागरूक
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बात चाहे एचआईवी संक्रमण के कारणों पर हो या संक्रमित मरीज के साथ बेहतर रवैये पर। इन सभी मुद्दों पर युवा खुद को जागरुक मानते हैं। एडस्‌-डे के पहले दिन जब एचआईवी एड्स को लेकर शहर के युवाओं से बात की तो उनका कहना था युवा न केवल जागरुक है बल्कि अपनी जिम्मेदारी से वाकिफ भी हैं।

शंका में डॉक्टर बेहतर विकल्प
एचआईवी एड्स के प्रति युवा अभी पूरी तरह जागरुक नहीं है। मेरा मानना है कि उसे अपनी शंका का सामाधान करना है तो दोस्तों से पूछने की बजाय डॉक्टर पास जाना बेहतर विकल्प होता है। हां लेकिन इस विषय पर हुए प्रचार से इतना जागरुकता तो आई है कि युवाओं में इसका डिस्कशन होता है। - वंदना भावसार

युवाओं के पास वक्त कम
शायद मेरी तरह ही लगभग सभी युवा एचआईवी एड्स के बारे में पूरी जानकारी रखते हैं। युवाओं को जागरुक करने के पीछे मीडिया में हुए प्रचार की भूमिका है। एचआईवी एड्स पर बात करने के बारे में अभी भी जनरेशन ओपन नहीं हुई है कि वह घर में जिज्ञासाओं का समाधान कर सके। मेरा मानना है कि आधे से ज्यादा कैरियर ओरिएंटेड युवाओं के पास इतना समय भी नहीं दे पाते कि ऐसे सामाजिक मु्‌द्दों पर वे बात कर सकें। -अदिती गुप्ता

माउथ-टू-माउथ
मेरी तरह ज्यादातर युवाओं को एचआईवी एड्स के बारे में जानकारी माउथ-टू-माउथ पब्लिसिटी से ही मिलती है। युवाओं में इस मुद्दे पर बात तो होती है लेकिन उसमें से आधे मौके पर मजाक के रुप में आधे मौके पर सीरियस डिस्कशन। -निलेश गुप्ता

परिचर्चा की जरूर
युवा भले ही एड्स के प्रति जागरुक हैं लेकिन फिर भी शंका का सामाधान करने के लिए डॉक्टर की सलाह ही बेहतर विकल्प है। मेरा मानना कि हर परिवार में इस मुद्दे पर स्वस्थ परिचर्चा होना चाहिए। इससे आने वाली पीढ़ी में जागरुकता तो आएगी ही वह भ्रमित भी नहीं होगा।-रवि राहोरा
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