शायद इसके पीछे कारण यही है कि ये वैज्ञानिक आमतौर पर अपनी दुनिया में ही खोए रहते हैं। अपने काम में डूबे रहते हैं। इससे अपने काम में तो ये माहिर होते हैं, लेकिन अपने क्षेत्र के हीरो जीवन के क्षेत्र में जीरो साबित हो जाते हैं। दूसरी तरफ पाया गया है कि ऐसे लोग जो अक्सर लोगों के साथ संवाद-संपर्क में रहते हैं, उनकी स्मृति काफी तेजी होती है। यही वजह है कि राजनेताओं, टेलीफोन ऑपरेटरों, कंपनियों के स्वागताधिकारियों, कंडक्टरों, दुकानदारों और उन तमाम पेशे के लोगों की याददाश्त काफी तेज होती है, जो दिन में कई बार अलग-अलग तरह के लोगों के संवाद-संपर्क में आते हैं।
सवाल है आखिर अलग-अलग या ज्यादातर लोगों से संवाद रखने से स्मृति कैसे तीव्र होती है और बुद्धिमत्ता में इजाफा क्यों होता है? इस | संवाद से एक बड़ा फायदा यह भी होता है कि इससे विवरण को समझने के नए कोण हासिल हो जाते हैं और विभिन्न दृष्टिकोणों से रू-ब-रू होने पर अपने दृष्टिकोण की गहराई का पता चल जाता है। साथ ही उसे दुरुस्त करने का रास्ता भी दिख जाता है |
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संबंध में हुए व्यापक शोध से जो निष्कर्ष निकलकर आए हैं उनके मुताबिक विभिन्न किस्म के लोगों के साथ विभिन्न किस्म का संवाद स्थापित करने वाले लोगों में बिम्बों की रचना तीव्र होती है। जब भी हम किसी से कोई बात सुनते हैं तो दिमाग उस बात को बाद में भी याद रखने के लिए उसे एक छवि में बदल देता है और फिर वह छवि या बिम्ब दिमाग में स्टोर हो जाता है। जो लोग बहुत कम लोगों से सामाजिक सरोकार रखते हैं, उन लोगों में बिम्बों की रचना तीव्रता से नहीं होती। लेकिन जो लोग बहुत लोगों से संवाद करते हैं उनमें बिम्बों का बनना तेज होता है और ये बिम्ब ज्यादा मजबूत होते हैं।
संवाद करने में लोग तीव्रता से सीखते हैं और अपनी समझ को तीव्रता से सुधारते भी जाते हैं। इसलिए किसी के साथ संवाद कायम करने में दो लाभ होते हैं। एक तो समझ बढ़ती है, दूसरी स्मृति बढ़ती है। समझ बढ़ने से सीखने की रफ्तार भी तेज होती है। एक और महत्वपूर्ण बात होती है जब हम किसी के साथ संवाद कायम करते हैं तो फिर चाहे वह हमारा कितना ही नजदीकी क्यों न हो, संवाद करते समय हममें एक किस्म की प्रतिद्वंद्विता आ जाती है और हम हर हालत में जीतना चाहते हैं। इस कारण हम संवाद में सजग हो जाते हैं और अपनी अधिकतम तर्क क्षमता का इस्तेमाल करते हैं। इसके विरुद्ध जब हम लोगों से मिलते-जुलते नहीं, उनसे बातें नहीं करते तो हमारी अपनी समझ भी गैर आजमाई किस्म की समझ बन जाती है। किसी के साथ संवाद करना दरअसल अपनी समझ को अनुमान के दायरे से निकालकर मान्यता के मैदान में उतार देना है। अगर ज्यादातर लोग उसकी काट नहीं ढूँढ पाते तो आपकी समझ जीत जाती है और अगर लोग आपकी समझ को टिकने नहीं देते तो आपको अपनी समझ को और बेहतर व तर्कपूर्ण बनाने की चुनौती हासिल होती है।
संवाद से एक बड़ा फायदा यह भी होता है कि इससे विवरण को समझने के नए कोण हासिल हो जाते हैं और विभिन्न दृष्टिकोणों से रू-ब-रू होने पर अपने दृष्टिकोण की गहराई का पता चल जाता है। साथ ही उसे दुरुस्त करने का रास्ता भी दिख जाता है।
इसलिए सामाजिक रूप से सक्रिय रहना मानसिक और शारीरिक दोनों ही तरह से स्वास्थ्य के लिए बेहतर है। इससे बौद्धिक क्षमता भी बढ़ती है, अतः जब कोई कहे कि क्या बातों में लगे रहते हैं? तो उसकी बात को अनसुनी कर दें और बातों में मशगूल रहें।
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