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कितना जरूरी, कितना खतरनाक
- डॉ. इदरीस खा

हृदयरोग घोषित होते ही मरीज बिस्तर पकड़ लेता है। परिजन भी उसे हाथ-पाँव हिलाने नहीं देते। ऐसे में नियमित कसरत पीछे छूट जाती है और बीमारी बढ़ने लगती है। हृदयरोग की समस्या तभी घेरती है जब व्यक्ति आरामतलब जीवनशैली अपना लेता है और खानपान पर नियंत्रण खो बैठता है। हृदयरोग की समस्या का पता चलते ही सबसे पहले आलस त्यागें। शरीर को चलायमान करें। डॉक्टर की सलाह पर नियमित व्यायाम करें।

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आधुनिक युग के अभिशापों में से एक है हृदयरोग। हृदयरोगियों की संख्या तेजी से बढ़ती जा रही है और नए उपचारों की मदद से अब ऐसे हजारों मरीज हैं जो गंभीर हृदयरोगी होने के बावजूद भी सुचारु रूप से अपना जीवन व्यतीत कर रहे हैं। व्यायाम हृदयरोगियों के जीवन का ऐसा पहलू है जिसको लेकर कई भ्रांतियाँ और सवाल मन में होते हैं। यहाँ उन सवालों के जवाब खोजने की कोशिश की गई है।

भ्रांति : व्यायाम करना बहुत खतरना

यह बेहद प्रचलित धारणा है कि यदि हृदयरोगी कसरत या व्यायाम करेगा तो अचानक कुछ भी हो सकता है। यह बात उन लोगों के लिए सही है जो कि व्यायाम के बिलकुल भी आदी नहीं हैं और अचानक भारी या बहुत सारा व्यायाम करने की कोशिश करते हैं। व्यायाम को वैसे ही करना चाहिए जैसे कोई गाड़ी चलाता है। यानी पहले फर्स्ट गियर में धीरे-धीरे आगे बढ़ता है। सेकंड गियर में थोड़ी तेज और फिर तीसरे गियर में चलाते हुए टॉप गियर में गाड़ी पहुँच जाती है। ऐसे चलाने से इंजन डैमेज नहीं होता इसी तरह यदि व्यायाम की आदत शरीर को धीरे-धीरे डाली जाए तो कभी भी नुकसान नहीं हो सकता। हृदयरोगियों को चाहिए कि अपनी बीमारी के मद्देनजर अपने डॉक्टर की सलाह के मुताबिक छोटे लेवल से व्यायाम शुरू करें और समय के साथ अपनी कैपेसिटी को ध्यान में रखकर बढ़ाएँ। यदि आपके हृदय को कंडीशनिंग के लिए समय मिलेगा तो उचित प्रकार से की गई कसरत जीवन को बढ़ाएगी, उसे घटाएगी नहीं।

भ्रांति : व्यायाम पहले से बीमार हृदय पर बुरा असर डालता ह

यह सच है कि व्यायाम के दौरान रक्तचाप बढ़ता है और हृदयगति बढ़ जाती है, लेकिन इससे हृदय पर कई बहुत अच्छे दूरगामी परिणाम होते
यह सच है कि व्यायाम के दौरान रक्तचाप बढ़ता है और हृदयगति बढ़ जाती है, लेकिन इससे हृदय पर कई बहुत अच्छे दूरगामी परिणाम होते हैं। नियमित व्यायाम करने से उच्च रक्तचाप नियंत्रित रहता है
हैं। नियमित व्यायाम करने से उच्च रक्तचाप नियंत्रित रहता है और कसरत के दौरान रक्तचाप और हार्ट रेट उतना नहीं बढ़ पाते जिससे हृदय पर उसका भार पड़ सके। नियमित व्यायाम करने वाले रोगियों की सामान्य हृदयगति और रक्तचाप उन रोगियों से अच्छा होता है जो कि नियमित व्यायाम नहीं करते।


नियमित व्यायाम करते रहने से ऐसे मरीज जिनको मधुमेह या शक्कर की बीमारी होती है उनका शुगर लेवल भी ज्यादा नियंत्रित रहता है और मधुमेह से होने वाली अन्य समस्याओं पर भी रोक लगती है।
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